मुख्यपृष्ठनए समाचारमहंगाई की मार, घर ही बना कारखाना! ... १००-३०० में दिनभर खट...

महंगाई की मार, घर ही बना कारखाना! … १००-३०० में दिनभर खट रहीं  महिलाएं; गरीब-सामान्य परिवारों के लिए घर चलाना भी हुआ दुश्वार

सामना संवाददाता / मुंबई
महंगाई ने गरीब और निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों का ऐसा बजट बिगाड़ दिया है कि अब घर की चहारदीवारी ही कारखाना बनती जा रही है। मुंबई, नालासोपारा और नई मुंबई की बस्तियों में हजारों महिलाएं गहने, हेयर एक्सेसरीज, बिंदी, खिलौने, कपड़ों की फिनिशिंग, इलेक्ट्रॉनिक सोल्डरिंग, राखी और फूलमाला जैसे काम घर बैठे कर रही हैं, लेकिन पूरे दिन खटने के बाद भी उनके हाथ में आते हैं महज १०० से ३०० रुपए। यह कड़वी तस्वीर युवा की नई रिपोर्ट में सामने आई है।
इन महिलाओं की औसत कमाई २०-३० रु. प्रति घंटा बताई गई है। कई मामलों में यह कमाई १५ रु. प्रति घंटे तक गिर जाती है, जबकि मुंबई में अकुशल मजदूरी का मानक करीब ५२० रु. प्रतिदिन है। यानी काम पूरा, मेहनत पूरी, लेकिन मजदूरी आधी से भी कम।

महंगाई का सबसे क्रूर असर
बच्चों तक को काम में बंटाना पड़ रहा है हाथ

महंगाई का सबसे क्रूर असर यह है कि परिवार का खर्च निकालने के लिए बच्चों तक को काम में हाथ बंटाना पड़ रहा है।
नालासोपारा में सर्वेक्षण की गई महिला कामगारों में बड़ी संख्या ने माना कि बच्चे भी ऑर्डर पूरा करने में मदद करते हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है और वे सुई, ब्लेड तथा अन्य खतरनाक औजारों के संपर्क में आते हैं। उधर, इन महिलाओं की अपनी सेहत भी दांव पर लगी है। कमर और गर्दन का दर्द, आंखों पर जोर, हाथों में सूजन और चोट जैसी समस्याएं आम हैं। लंबे समय तक खराब रोशनी और असुविधाजनक मुद्रा में बैठकर काम करने से शरीर पर लगातार दबाव पड़ता है, लेकिन सामाजिक सुरक्षा लगभग नहीं के बराबर है। विडंबना यह है कि मुंबई की चमकदार अर्थव्यवस्था इन्हीं अदृश्य हाथों से सस्ता सामान तैयार करवाती है, लेकिन इन हाथों की मजदूरी इतनी कम है कि परिवार का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।

अन्य समाचार