– देवनार डंपिंग ग्राउंड खाली कराने की कवायद तेज,
`२,५३७ करोड़ की सफाई परियोजना का परीक्षण शुरू
– १२४ एकड़ जमीन धारावी पुनर्विकास के पुनर्वास आवासों के लिए चाहिए
हाई कोर्ट और केंद्र की पर्यावरण मंजूरी अब भी बाकी
सामना संवाददाता / मुंबई
जरूरी कानूनी और पर्यावरणीय मंजूरियां अभी पूरी नहीं हुई हैं, लेकिन देवनार डंपिंग ग्राउंड की जमीन को धारावी पुनर्विकास के लिए तैयार करने की कवायद तेज हो गई है। करीब नौ महीने की देरी के बाद मनपा ने रु.२,५३७ करोड़ की जैव-उपचार परियोजना के तहत परीक्षण कार्य शुरू कर दिया है। मौके पर मशीनें उतार दी गई हैं और पुराने कचरे को अलग-अलग कर ढेर लगाने का काम शुरू हो चुका है। हालांकि, इस कचरे को फिलहाल परिसर से बाहर नहीं ले जाया जा सकता।
इस जल्दबाजी की वजह देवनार की वही १२४ एकड़ जमीन है, जिसे महाराष्ट्र सरकार ने धारावी पुनर्विकास परियोजना के तहत पुनर्वास आवास बनाने के लिए चिह्नित किया है। धारावी परियोजना महाराष्ट्र सरकार और अडानी समूह की संयुक्त व्यवस्था के तहत चलाई जा रही है। इसे क्रियान्वित करने वाली विशेष कंपनी में अडानी प्रॉपर्टीज की ८० प्रतिशत हिस्सेदारी और झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण की २० प्रतिशत हिस्सेदारी है।
लेकिन रास्ता अभी साफ नहीं है। हाल के एक महीने में लंबित पांच अनुमतियों में से तीन मिल चुकी हैं, मगर दो सबसे महत्वपूर्ण मंजूरियां अब भी बाकी हैं- मुुंबई हाई कोर्ट की अनुमति और केंद्र सरकार की पर्यावरण मंजूरी। इन्हीं के बिना कचरे को देवनार से बाहर ले जाने का काम शुरू नहीं हो सकता।
इससे पहले अगस्त में सामने आए दस्तावेजों में स्थिति और गंभीर थी। उस समय सात आवश्यक मंजूरियों में से पांच लंबित थीं। मैंग्रोव, वन्यजीव और पर्यावरण से जुड़ी अनुमतियों के लिए आवेदन भी तय समय से काफी देर बाद किए गए थे। इससे परियोजना की समयसीमा और २०२९ तक काम पूरा करने की क्षमता पर सवाल उठे थे। अब सवाल यही है—जब अदालत और पर्यावरण की दो अहम हरी झंडियां अभी मिली ही नहीं हैं, तो जमीन को हस्तांतरण और निर्माण के लिए तैयार करने की इतनी तेजी क्यों?
