-मुख्य कार्यकारी अधिकारी करण अडानी और पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी बी. रवि ने १३.६५-१३.६५ लाख चुकाए
मुंबई। हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अडानी समूह से जुड़े मामलों की जांच में शामिल एक महत्वपूर्ण प्रकरण अब सिर्फ २७.३० लाख के संयुक्त भुगतान पर समाप्त हो गया है। अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी करण अडानी और कंपनी के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी बी. रवि ने सेबी के साथ समझौता करते हुए १३.६५ लाख,१३.६५ लाख जमा किए, जिसके बाद नियामक ने उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही का निपटारा कर दिया।
मामला पीएमसी प्रोजेक्ट्स इंडिया और अडानी पोर्ट्स तथा उसकी सहायक कंपनियों के बीच बैंकिंग लेनदेन, अंतर-कंपनी सुरक्षा जमा और उनसे संबंधित वित्तीय खुलासों से जुड़ा था। सेबी की जांच में यह सवाल उठा था कि क्या इन लेन-देन की प्रकृति और संबंधित पक्षों से जुड़े संबंधों का पर्याप्त खुलासा किया गया था। महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों अधिकारियों ने समझौते के दौरान किसी गलत काम को न स्वीकार किया और न ही अस्वीकार। सेबी की समझौता व्यवस्था में ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत पक्ष लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए भुगतान कर मामला समाप्त कर सकते है। यह प्रकरण उन २४ मामलों में शामिल था जिनकी जांच हिंडनबर्ग रिसर्च की जनवरी २०२३ की रिपोर्ट के बाद हुई थी।
अडानी समूह शुरू से शेयर मूल्य में हेरफेर और संबंधित पक्षों को छिपाने जैसे आरोपों को खारिज करता रहा है। अब सवाल यह उठता है कि जब मामला हजारों करोड़ के कारोबारी लेन-देन और बाजार की पारदर्शिता से जुड़ा हो, तो २७ लाख का समझौता क्या वास्तव में पर्याप्त निवारक संदेश देता है? छोटे निवेशक के लिए नियम सख्त, बड़े कारोबारी घरानों के लिए समझौता आसान यही इस मामले की सबसे बड़ी आर्थिक और राजनीतिक बहस है।
