डायरेक्टर – प्रियदर्शन
कास्ट – सैफ अली खान, अक्षय कुमार, बोमन ईरानी, श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, मोहनलाल, असरानी, शारिब हाशमी, पहल चौधरी
ड्यूरेशन – २ घंटे ४४ मिनट
रेटिंग – ३.५/५
साइकोलॉजिकल एक्शन थ्रिलर में आमतौर पर नायक और खलनायक की भिड़ंत ताकत, हिंसा और चालबाजी के सहारे आगे बढ़ती है। प्रियदर्शन की ‘हैवान’ इस फॉर्मूले में थोड़ा बदलाव करती है। यहां असली मुकाबला शरीर की ताकत से ज्यादा समझ, धैर्य और सामने वाले की अगली चाल पहचानने का है। अक्षय कुमार का परशुराम रहस्यमयी और खतरनाक है, वहीं सैफ अली खान का श्याम नेत्रहीन होने के बावजूद अपनी सुनने की क्षमता, सूझबूझ और इंस्टिंक्ट के सहारे उसके सामने मजबूती से खड़ा होता है।
कहानी में लगातार बदलता खेल
फिल्म की कहानी का आकर्षण इसके बदलते समीकरणों में है। परशुराम अपनी योजनाओं से श्याम को फंसाने की कोशिश करता है, लेकिन श्याम भी उसकी हर गतिविधि को आवाजों और आसपास के माहौल को महसूस करके समझने की कोशिश करता है। दोनों के बीच चलने वाला यह खेल एक जगह टिकता नहीं। जैसे ही लगता है कि कहानी का अगला पड़ाव समझ में आ गया है, नया मोड़ सामने आ जाता है। श्याम का अपने करीबियों को सुरक्षित रखने का संघर्ष कहानी में भावनात्मक पहलू भी जोड़ता है।
अक्षय का शांत लेकिन खतरनाक अंदाज
परशुराम के किरदार में अक्षय कुमार ने अपने अभिनय का एक अलग रंग दिखाया है। वह किरदार को जरूरत से ज्यादा आक्रामक बनाने के बजाय उसकी रहस्यमय प्रवृत्ति पर जोर देते हैं। कई दृश्यों में उनका शांत रहना ही उनके किरदार को ज्यादा डरावना बनाता है। चेहरे के भाव, बॉडी लैंग्वेज और अचानक बदलता व्यवहार परशुराम के चरित्र में अनिश्चितता बनाए रखते हैं।
सैफ की खामोशी बनी ताकत
श्याम के रूप में सैफ अली खान का अभिनय संयमित है। उन्होंने नेत्रहीन किरदार को केवल असहाय व्यक्ति के रूप में पेश नहीं किया, बल्कि उसकी दूसरी इंद्रियों और मानसिक मजबूती को उसकी सबसे बड़ी ताकत बनाया है। आवाजों को पहचानने और आस-पास की हलचल को महसूस करने का उनका अंदाज सहज लगता है। अक्षय के आक्रामक चरित्र के सामने सैफ का शांत और धैर्यपूर्ण अभिनय फिल्म की टक्कर को और प्रभावी बनाता है।
सहायक कलाकारों का अच्छा साथ
पहल चौधरी का किरदार कहानी के साथ धीरे-धीरे महत्वपूर्ण होता जाता है और उनके अभिनय में भावनात्मक गहराई दिखाई देती है। सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर और बोमन ईरानी ने भी अपनी भूमिकाओं को मजबूती दी है। शारिब हाशमी पुलिस अधिकारी के किरदार में सहज नजर आते हैं। असरानी की मौजूदगी फिल्म के गंभीर माहौल के बीच भावुक स्पर्श देती है।
प्रियदर्शन ने बनाए रखा तनाव
प्रियदर्शन ने फिल्म को केवल एक्शन और पीछा करने वाले दृश्यों तक सीमित नहीं रखा है। कहानी में मनोवैज्ञानिक दबाव, रणनीति और किरदारों के बीच चलने वाले मानसिक संघर्ष को भी पर्याप्त जगह दी गई है। २ घंटे ४४ मिनट की लंबाई के बावजूद फिल्म कई हिस्सों में दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखने में सफल होती है। एक्शन, सस्पेंस और भावनात्मक दृश्यों का संतुलन बड़े पर्दे के अनुभव को बेहतर बनाता है।
बैकग्राउंड स्कोर बढ़ाता है रोमांच
प्रीतम का संगीत फिल्म की कहानी से जुड़ा हुआ महसूस होता है। खासकर बैकग्राउंड स्कोर तनावपूर्ण दृश्यों को और प्रभावी बनाता है। परशुराम और श्याम के बीच संघर्ष बढ़ने के साथ संगीत भी माहौल में बेचैनी पैदा करता है। ‘मेरे हीरो हैं’ भावुक हिस्सों के साथ फिट बैठता है, जबकि ‘रंगियारा’ कहानी के अपेक्षाकृत हल्के पलों में राहत देता है।
‘ओप्पम’ से प्रेरित, लेकिन प्रस्तुति अलग
‘हैवान’ की कहानी प्रियदर्शन की मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ से जुड़ी है, लेकिन हिंदी संस्करण को उसी कहानी की हूबहू प्रस्तुति नहीं कहा जा सकता। हिंदी दर्शकों को ध्यान में रखते हुए इसके भावनात्मक और सिनेमाई हिस्सों में बदलाव किया गया है। अक्षय कुमार और सैफ अली खान की स्टार इमेज के अनुरूप कहानी को नए अंदाज में पेश किया गया है। मोहनलाल की मौजूदगी मूल फिल्म से इसका संबंध भी बनाए रखती है।
क्यों देखें?
‘हैवान’ की सबसे बड़ी ताकत अक्षय कुमार और सैफ अली खान के बीच होनेवाली असामान्य भिड़ंत है। एक तरफ रहस्यमयी और खतरनाक परशुराम है तो दूसरी तरफ अपनी कमजोरी को ही ताकत में बदलने वाला श्याम। पहल चौधरी का किरदार और प्रियदर्शन का सस्पेंस भी फिल्म को मजबूती देते हैं। अगर आपको ऐसी थ्रिलर पसंद हैं, जिनमें हर मुकाबला सिर्फ मारधाड़ से नहीं बल्कि दिमाग और रणनीति से जीता जाता है, तो ‘हैवान’ एक अच्छा सिनेमाई विकल्प साबित हो सकती है।
