सामना संवाददाता/ मुंबई
शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने महापौर बंगले की मरम्मत और नई गाड़ियों की खरीद पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाने को लेकर मुंबई मनपा प्रशासन और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महापौर के बंगले को ताजमहल बनाना है? जो इतना पैसा खर्चा किया जा रहा है। जब इसे रिपेयर किया जा चुका है फिर अब जनता की गाढ़ी कमाई का इतना पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है?
मीडिया से बातचीत में आदित्य ठाकरे ने कहा कि शिवसेना के पूर्व महापौरों ने भी कभी इस तरह का खर्च नहीं किया। उन्होंने कहा कि एक विधायक को पूरे विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए केवल पांच करोड़ रुपए की निधि मिलती है, जबकि महापौर बंगले की मरम्मत पर साढ़े पांच करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा डेढ़ से दो करोड़ रुपए की नई गाड़ियां खरीदी जा रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर यह खर्च जनता की सुविधाओं पर होने के बजाय खुद पर क्यों किया जा रहा है? क्या महापौर के बंगले को पर्यटन स्थल बनाया जा रहा है? इससे बेहतर होता कि मुंबई की सफाई, कचरा प्रबंधन, सड़कों और बेस्ट जैसी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाता।
गाड़ियों के लिए पैसा है, लेकिन चौपाटी की सफाई के लिए नहीं
आदित्य ठाकरे ने कहा कि यदि नई गाड़ियों की खरीद के लिए धन उपलब्ध है, तो फिर चौपाटियों की सफाई के लिए पैसा क्यों नहीं है? उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं, बेस्ट की बसों की संख्या लगातार घट रही है, कर्मचारियों को समय पर वेतन और पेंशन नहीं मिल रही है तथा सड़कों के कंक्रीटीकरण के बावजूद गड्ढे आज भी बने हुए हैं। इसके बावजूद महापौर बंगले और नई गाड़ियों के लिए आसानी से करोड़ों रुपए उपलब्ध करा दिए जाते हैं।
`शिंदे की जेब भर गई, लेकिन मुंबई के गड्ढे नहीं भरे’
आदित्य ठाकरे ने मुंबई की सड़क परियोजनाओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चार वर्ष पहले एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में दावा किया था कि दो वर्षों में मुंबई की सभी सड़कें चमचमाती नजर आएंगी, लेकिन हकीकत यह है कि सड़कों के गड्ढे आज भी जस के तस हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शिंदे की जेब भर गई, लेकिन मुंबई के गड्ढे नहीं भर पाए।
पहले चंदे की चोरी की जांच करें
सिद्धिविनायक मंदिर में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर भी आदित्य ठाकरे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सबसे पहले चंदे की कथित चोरी की जांच शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने वाराणसी सहित अन्य मंदिरों में हुए कथित मामलों की भी जांच की मांग की। साथ ही दावा किया कि किसके कितने फ्लैट हैं, वे कहां स्थित हैं और किसके पास कितनी चाबियां हैं, इसकी जानकारी भी उनके पास मौजूद है। समय आने पर उजागर करेंगे।
