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आरक्षण की सीमा न लांघें वरना चुनाव रोक देंगे! …सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार को हड़काया

सामना संवाददाता / मुंबई
स्थानीय निकाय चुनावों में ५० प्रतिशत आरक्षण की सीमा नहीं लांघी जा सकती। अदालत को यह बहाना न दें कि चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कल राज्य चुनाव आयोग और सरकार को कड़ी चेतावनी दी कि अगर आरक्षण की सीमा का उल्लंघन किया गया तो महाराष्ट्र में चुनाव रोक दिए जाएंगे। साथ ही आयोग और सरकार को बुधवार को आरक्षण पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने २०२१ में एक ऐतिहासिक पैâसला सुनाते हुए स्थानीय निकाय चुनावों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए ५० प्रतिशत आरक्षण की सीमा तय की थी। आरोप है कि महाराष्ट्र में हो रहे स्थानीय निकाय चुनावों में उस आरक्षण सीमा का उल्लंघन किया गया। विकास गवली ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना ​​याचिका दायर कर दावा किया है कि कुछ जगहों पर चुनाव प्रक्रिया में कुल आरक्षण ७० प्रतिशत तक पहुंच गया है। सोमवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष इस याचिका पर सुनवाई हुई।
याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य चुनाव आयोग, राज्य के मुख्य सचिव और राजस्व एवं नगरीय विकास विभाग के सचिव को अवमानना ​​नोटिस जारी किया था। इसी के तहत सोमवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य चुनाव आयोग की ओर से यह कहकर स्थिति को संक्षेप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया कि चुनाव प्रक्रिया बहुत आगे बढ़ चुकी है। इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए पीठ ने राज्य चुनाव आयोग और महाराष्ट्र सरकार को आड़े हाथों लिया।

समय बर्बाद न करें
पीठ ने कहा, ‘चुनाव का कारण बताकर समय बर्बाद करने की कोशिश न करें, आप कुल आरक्षण की ५० प्रतिशत की सीमा को पार नहीं कर पाएंगे।’ पीठ ने चेतावनी दी कि यदि यह सीमा पार की गई तो महाराष्ट्र में चुनाव स्थगित कर दिए जाएंगे। इससे स्तब्ध चुनाव आयोग और सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए एक दिन का समय मांगा। सॉलिसिटर जनरल मेहता के अनुरोध पर पीठ ने सुनवाई बुधवार के लिए तय की। उस समय पीठ ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार को आरक्षण के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करने का सख्त आदेश दिया।

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