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चंद्र ग्रहण के चलते दोपहर में ही हुई काशी के गंगा घाटों पर हुई गंगा आरती, ग्रहण के सूतक काल मंदिरों के भी बंद हुए कपाट

 उमेश गुप्ता / वाराणसी

वाराणसी के दशाश्वमेध घाट सहित प्रमुख घाटों पर होने वाली गंगा आरती इस बार कुछ अलग रही। 7 सितंबर को लगने वाले चंद्रग्रहण के चलते शाम की जगह दोपहर में ही विशेष आरती संपन्न की गई। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि चंद्रग्रहण की वजह से दोपहर 12:57 बजे से सूतक काल शुरू हो गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में किसी भी प्रकार की पूजा-अर्चना नहीं होती, इसलिए संध्या आरती को पहले ही पूरा कर लिया गया। वहीं, सुबह की आरती अपने तय समय पर की गई।

गंगा सेवा निधि के कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी ने बताया कि जब भी चंद्रग्रहण या सूर्यग्रहण लगता है, तो सूतक काल से पहले ही आरती कराई जाती है। ग्रहण के दौरान और सूतक काल में धार्मिक अनुष्ठान स्थगित कर दिए जाते हैं। इस परंपरा के तहत इस बार भी विशेष गंगा आरती दोपहर में कराई गई।

आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और दिव्य वातावरण में मां गंगा की आराधना की। बदलते समय और परंपरा के अनोखे संगम ने आरती को और खास बना दिया। अस्सी घाट पर भी शाम को होने वाली गंगा आरती दोपहर के समय ही कराई गई।

चंद्र ग्रहण के कारण दोपहर 12 बजे से शुरू सूतक काल में नगर के प्रमुख देवालय के कपाट बंद कर दिए गए। जबकि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का कपाट चंद्र ग्रहण के स्पर्श काल से ढाई घंटा पूर्व बाद किया गया।

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