मुख्यपृष्ठटॉप समाचार१० साल में ईडी के ५,८९२ केस; १५ को सजा!..यह है ईडी...

१० साल में ईडी के ५,८९२ केस; १५ को सजा!..यह है ईडी का पॉलिटिकल ट्रैक रिकॉर्ड… भाजपा की टॉर्चर शाखा बनकर रह गई है केंद्रीय एजेंसी

-नाटकीय ढंग से ४९ मामले बंद,

-कन्विक्शन रेट मात्र ०.२५ प्रतिशत

-निशाने पर केवल विपक्षी नेता

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

पिछले एक दशक में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का नाम विपक्षी नेताओं और कारोबारियों पर ईडी की ताबड़तोड़ कार्रवाइयां चर्चा में रही हैं, लेकिन अब एक हैरान करनेवाली जानकारी सामने आई है। हजारों मामलों में कार्रवाई के बावजूद ईडी पिछले १० सालों में सिर्फ १५ लोगों को ही सजा दिला पाई है। ईडी की इन कार्रवाई का कन्विक्शन दर महज ०.२५ प्रतिशत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साढ़े दस साल में धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ५,८९२ मामले दर्ज किए, लेकिन इनमें से केवल १५ लोगों को सजा हुई। यह जानकारी वित्त मंत्रालय ने राज्यसभा में दी। सदन में उनसे ईडी के २०१५ से दर्ज उन सभी मामलों का ब्योरा पूछा गया था, जिनमें अभी तक अदालतों में आरोपपत्र भी दाखिल नहीं किया गया है और ना ही आरोपितों का ट्रायल शुरू हुआ है। साथ ही केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से मुकदमे बंद करने का भी ब्योरा मांगा गया।
केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने दिया जवाब
इस पर मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि जनवरी, २०१५ से जून, २०२५ के बीच प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट, २००२ के प्राविधानों के तहत ५,८९२ मामलों की जांच की है।’ चौधरी ने कहा कि जून, २०२५ तक विशेष अदालतों ने इन मामलों में आठ सजा आदेशों में १५ व्यक्तियों को दोषी ठहराया है। जवाब में ईडी की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्टों के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है। अदालतों ने यह माना है कि यदि प्राथमिक मामला किसी न्यायालय के समक्ष है तो पीएमएलए मामला अपने आप समाप्त हो जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी ईडी को फटकार

हाल ही में एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए। रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की पूर्व अध्यक्ष रश्मि सलूजा को कानूनी सलाह देनेवाले वकीलों अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को ईडी ने समन भेजा था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडी सारी हदें पार कर रहा है। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने इस मामले में दिशा-निर्देश बनाने की बात कही।
ईडी की कार्रवाई में कई बड़े नाम शामिल रहे हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जैसे नेता ईडी की जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा, कई कारोबारी और प्रभावशाली लोग भी एजेंसी के निशाने पर हैं।
वकीलों ने चिंता जताई कि ऐसी कार्रवाइयों से उनकी स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। ईडी की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने माना कि यह गलत था और एजेंसी को वकीलों को समन न भेजने के निर्देश दिए गए हैं। रश्मि सलूजा से जुड़ा यह मामला है, जिनके खिलाफ ईडी ने सितंबर २०२४ में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया था।
इस मामले में उनके वकीलों को समन भेजा गया। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को फटकार लगाई थी।

अन्य समाचार