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संपादकीय : पाकिस्तान का तमाशा

पाकिस्तान और चीन हमारे दो पड़ोसी देश हैं। इसलिए इच्छा हो या न हो वहां की घटनाओं, घटनाक्रमों पर हिंदुस्थान को नजर रखनी ही पड़ती है। खासकर पाकिस्तान के राजनीतिक घटनाक्रमों पर तो हिंदुस्थान को पैनी नजर रखनी पड़ती है। इमरान सरकार के खिलाफ विरोधियों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की वजह से पाकिस्तान में बीते १५ दिनों से रोज नया राजनीतिक घमासान चल रहा है। इसके उपाय के रूप में ढलते हुए प्रधानमंत्री इमरान खान ने अंतत: पाकिस्तान की संसद को ही बर्खास्त कर दिया। इमरान ने सभागृह में शक्ति परीक्षण का सामना करने की बजाय सीधे संसद को विसर्जित करके तीन महीने में फिर से चुनाव करवाने की घोषणा कर दी। इमरान के इस अप्रत्याशित कदम से अविश्वास प्रस्ताव लानेवाले विपक्ष, इमरान की ‘तहरीक-ए-इंसाफ’ पार्टी के बागी मंत्री और सांसद तथा पाकिस्तानी फौज असमंजस में पड़ गई। बहुमत सिद्ध करने की बजाय इमरान ने संसद बर्खास्त करवाकर संविधान का उल्लंघन किया है, ऐसा आरोप पाकिस्तानी मीडिया द्वारा लगाए जाने पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के खिलाफ विपक्ष वहां की सर्वोच्च न्यायालय में दौड़ पड़ा। न्यायालय ने संसद के कामकाज के सभी दस्तावेज मंगाए हैं और आगामी कुछ दिनों में राजनीतिक दंगल का यह दावानल पाकिस्तानी सर्वोच्च न्यायालय में भड़कता दिखेगा। संसद विसर्जित करते समय प्रधानमंत्री इमरान खान ने सरकार अस्थिर करने के लिए सीधे अमेरिका पर आरोप लगा दिया। विपक्ष के नेता और सरकार में अपने विरोधियों को हथियार बनाकर अमेरिका ने ही हमारी सरकार को बेदखल करने का षड्यंत्र रचा था, ऐसा गंभीर आरोप इमरान खान ने लगाया था। ये आरोप कितना सही और कितना झूठा है इस पर पाकिस्तान में बवाल मचने के दौरान ही रूस ने इसमें कूदकर इमरान के दावे की पुष्टि की है। इमरान खान ने अमेरिका और पश्चिमी देशों के विरोध को नकारकर दो महीने पहले रूस में ब्लादिमीर पुतिन से जो मुलाकात की उसी की कीमत इमरान को चुकानी पड़ी है। ऐसा आरोप रूस के विदेश मंत्री ने लगाया है। इमरान को राजनीतिक दृष्टि से परेशानी में डालने का यह अमेरिका का शर्मनाक हस्तक्षेप होने की प्रतिक्रिया रूस ने दर्ज कराई है। किसी भी देश में जाकर नाक घुसेड़ने और वहां के अंदरूनी मामलों में टांग अड़ाने के अमेरिका के पुराने इतिहास को देखते हुए इमरान व रूस के आरोप को स्पष्ट रूप से गलत ऐसा छाती ठोंककर कोई भी नहीं कह सकता है। इमरान और रूस द्वारा लगाए गए आरोपों को अमेरिका ने नकार दिया होगा फिर भी इस पर विश्वास कौन करेगा? इमरान ने अमेरिका को ठेंगा दिखाते हुए २४ फरवरी को रूस में जाकर पुतिन से मुलाकात की और उसी दिन रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध का एलान किया था। इस पार्श्वभूमि में अमेरिका ने इमरान के तख्त के नीचे सुरंग बना डाली, ऐसा कहा जा रहा है। उसमें तथ्य होगा भी क्योंकि कल तक अमेरिका की खैरात पर जीनेवाला और उठ कहने पर उठनेवाला पाकिस्तान अचानक अमेरिका की गोद से उतरकर रूस की जांघ पर जाकर बैठ गया इसलिए अमेरिका का खून खौल उठा होगा तथा इसीलिए अमेरिका ने इमरान की कुर्सी के नीचे पटाखे लगाए होंगे, ऐसा आरोप लगाया जा रहा है तो अमेरिका के पुराने इतिहास को देखते हुए इसे व्यर्थ नहीं कहा जा सकता है। आर्थिक दिवालिएपन से पहले ही पाकिस्तान की कमर टूट गई है। उस पर महंगाई में लगी आग, बेरोजगारी और दरिद्रता जैसी समस्याएं मुंह बाए खड़ी रहने के दौरान पाकिस्तान में राजनीतिक घमासान उफान पर है। इन दंगों से निपटने के लिए इमरान ने सीधे संसद को ही बर्खास्त कर दिया, परंतु दंगों की आग शांत होने की बजाय और अधिक ही भड़क गई है। पाकिस्तान में भड़के इस राजनीतिक संघर्ष में और तेल डालने का काम अमेरिका तथा रूस जैसे शक्तिशाली देश कर रहे हैं। इसलिए पाकिस्तान पर आए राजनीतिक अस्थिरता के संकट के कम होने की बजाय और अधिक गहराने की ही आशंका अधिक है। सिर्फ धर्म के आधार पर हिंदुस्थान से फूटकर बाहर निकले पाकिस्तान में संसदीय लोकतंत्र की जड़ें कभी गहराई तक नहीं पनप पार्इं। इसलिए प्रत्येक दो-पांच वर्षों में पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता का तमाशा होता ही रहता है। परंतु इमरान को कठपुतली की तरह प्रधानमंत्री पद पर बैठानेवाली पाकिस्तानी सेना यह तमाशा मूक दर्शक बनकर क्यों देख रही है? या पाकिस्तान की फौज भी अमेरिका की इमरान विरोधी साजिश में शामिल है, यह आनेवाला वक्त ही बताएगा।

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