जब राज्य में महाविकास आघाडी की सरकार थी, तब भाजपा के हिंदुत्व में जहरीला उबाल था। उस जहरीले उबाल में पालघर साधु हत्याकांड को भी इसमें शामिल करना होगा। पांच साल पहले, अप्रैल में दहाणू के गडचिंचले गांव में दो साधुओं, चिन्मयानंद स्वामी और स्वामी सुशीलगिरी महाराज की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में पूरा गांव शामिल था। उससे कुछ दिन पहले अफवाह पैâली थी कि बच्चा चोर गिरोह गांव में आ रहा है। इसलिए पूरा गांव इस गिरोह को सबक सिखाने के लिए दिन-रात जाग रहा था। ऐसे में एक शाम, ये दोनों साधु गांव में घुस आए। गांव वालों ने उन्हें घेर लिया और पीट-पीटकर मार डाला। यह एक बहुत ही गंभीर अपराध था और पूरे गडचिंचले गांव के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और कार्रवाई शुरू हुई। इसमें हिंदुत्व को कोई खतरा नहीं था, लेकिन चूंकि उस समय महाराष्ट्र में ‘ठाकरे’ की सरकार थी इसलिए दिल्ली से काशी तक यह ढिंढोरा पीटा जाने लगा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनकी महाविकास आघाडी सरकार ने साधु हत्याकांड को अंजाम दिया है। महाराष्ट्र में भाजपा ने साधुओं के समर्थन में मार्च और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। भाजपा ने इस हत्याकांड के मुख्य सूत्रधार काशीनाथ चौधरी को फांसी देने की मांग की। अब हैरानी की बात यह है कि साधु हत्याकांड में भाजपा ने जिस काशीनाथ चौधरी की फांसी की मांग की थी, उसी चौधरी को भाजपा ने अपनी वॉशिंग मशीन में डालकर ‘साफ’ कर दिया है और उन्हें भाजपा में शामिल कर दिया है। भाजपा सांसद हेमंत सावरा ने साधु हत्याकांड के आरोपी को भाजपा में शामिल करने के लिए रेड कारपेट बिछा रखा है। कुल मिलाकर
भाजपा की नीति
इस तरह दिखाई देती है कि भले ही साधुओं ने अपनी जान गवां दी है, लेकिन हम अपनी राजनीति करते रहेंगे। काशीनाथ चौधरी उस समय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी थे इसलिए साधु हत्याकांड का दोष भी शरद पवार पर मढ़ा गया। यही काशीनाथ चौधरी विधानसभा उम्मीदवारी के लिए शिवसेना के दरवाजे तक भी आए थे, लेकिन उद्धव ठाकरे ने साधु हत्याकांड के आरोपियों को उम्मीदवारी देने से इनकार कर दिया था। एक हिंदू होने के नाते, उन्होंने वह रुख अपनाया, लेकिन अब अगर पालघर जिले में भाजपा को मजबूत करने के लिए चौधरी को भाजपा में प्रवेश दिया जा रहा है तो यह नीचता है। यह एक उदाहरण है कि राजनीतिक लाभ और चुनाव जीतने के लिए भाजपा कितनी नीचे गिर सकती है। अब जगह-जगह हो रहे हंगामे के कारण चौधरी का भाजपा में प्रवेश अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया, लेकिन भाजपा की जितनी बदनामी होनी थी हो ही चुकी है। भाजपा के हाल के सभी एंट्री विवादास्पद रहे हैं। दाऊद और सलीम कुत्ता के गुर्गों के रूप में जिनके खिलाफ भाजपा ने जमकर हंगामा किया था आज उन्हें प्रवेश देकर, भाजपा ने एक तरह से दाऊद इब्राहिम के लिए भी लाल कालीन बिछा दिया है। यह पार्टी कितनी नीचे गिर गई है। भाजपा ने सभी हत्यारों, लुटेरों और भ्रष्ट लोगों को अपनी पार्टी में शामिल करके अपनी पार्टी को ‘मजबूत’ और ‘पवित्र’ बना दिया। जब २०२० में पालघर में साधु हत्याकांड हुआ तो गृह मंत्रालय ने जांच के लिए दिल्ली से टीमें भेज दीं। प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री शाह और देवेंद्र फडणवीस ने साधु हत्याकांड के मामले में छाती पीटने का सार्वजनिक कार्यक्रम किया। महाविकास आघाडी सरकार को हिंदू विरोधी बताकर जगह-जगह तांडव नृत्य किए गए। दरअसल, साधु की हत्या करनेवाले आदिवासी और अंधविश्वासी थे। इसी अंधविश्वास के चलते साधु की हत्या हुई। हत्या के समय काशीनाथ चौधरी घटनास्थल पर ही मौजूद थे इसलिए भाजपा ने उन्हें आरोपी नंबर एक मानकर फांसी की सजा देने की मांग की। अब साधु हत्याकांड के आरोपी नंबर एक को गाजे-बाजे के साथ
भाजपा में शामिल कर
लिया गया। दहाणू की जनता को इस अटूट हिंदुत्व कार्य के लिए मुख्यमंत्री फडणवीस और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण का अभिनंदन करना चाहिए। क्या महाराष्ट्र के भाजपा नेता सोचते हैं कि चौधरी को भाजपा में शामिल करने से पालघर में मारे गए साधुओं की आत्मा को शांति मिलेगी और हिंदुत्व मजबूत होगा? फडणवीस गृह मंत्री भी हैं तो अब साधु हत्याकांड के नंबर एक आरोपी को ही भाजपा में शामिल करने से क्या पूरा मामला ही खत्म नहीं हो जाएगा? गृह मंत्री होने के नाते फडणवीस को इस सवाल का जवाब देना चाहिए। यह सब कानून और सत्ता की मनमानी है। गृह मंत्री फडणवीस खुलेआम यह मनमानी कर रहे हैं। मौत की सजा पाए अपराधियों को भाजपा में शामिल करके निर्दोष साबित करने का यह नया कदम खतरनाक है। ‘पालघर में साधु हत्याकांड ने हिंदुत्व को धक्का पहुंचाया है’ जैसे बचकाने बयान देने वाले भाजपा नेताओं ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ठाकरे को ही आरोपियों के पिंजरे में खड़ा कर दिया था। अब इस मंडली ने उसी हत्याकांड के मुख्य आरोपी काशीनाथ चौधरी को भाजपा में शामिल कर लिया है। इस घृणित कृत्य के लिए मुख्यमंत्री फडणवीस और उनके लोगों को उद्धव ठाकरे से माफी मांग कर प्रायश्चित करना चाहिए। मुद्दा काशीनाथ चौधरी का नहीं, बल्कि भाजपा के परले दर्जे के सड़े हुए इरादों का है। भाजपा पार्टी को मजबूत करने के लिए और कितने हत्यारे, आतंकवादी और आर्थिक अपराधियों को अपनी वॉशिंग मशीन में धोकर बाहर निकालेगी? भाजपा हिंदुत्व को लगा कीड़ा है। पालघर के मृत साधु भाजपा को शाप ही देंगे!
