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संपादकीय : राम रहीम की पिकनिक (भाजपा प्रायोजित)

अयोध्या के श्रीराम मंदिर पर डाका डालने का धार्मिक कार्य पूरा होने के बाद लगता है कि भाजपा ने रोहतक के राम रहीम बाबा की भगतगीरी शुरू कर दी है। श्रीराम ने १४ वर्ष का वनवास भोगा और फिर वे अयोध्या लौटे। रोहतक के राम रहीम को भारतीय अदालत ने २० साल के कारावास की सजा दो शिष्याओं के बलात्कार मामले में सुनाई है। बलात्कार मामले की यह जेल की सजा राम रहीम बाबा के नसीब में आया वनवास ही है। इसलिए भाजपा के मंत्री बीच-बीच में राम रहीम को हवा बदलने के लिए जेल से बाहर लाते हैं और उसे तरोताजा करके फिर जेल भेज देते हैं। अब रक्षाबंधन के मौके पर राम रहीम को जेल प्रशासन ने २१ दिनों की छुट्टी दी है। ‘फर्लो’ नियम के तहत राम रहीम को यह छुट्टी मिली है। कभी पैरोल, तो कभी फर्लो की छूट लेकर राम रहीम जेल से बाहर आता है और अपने भक्तों को आशीर्वाद देता है। उसमें भाजपा के ही लोग बड़ी संख्या में होते हैं। राम रहीम बाबा बाहर आए, इसके लिए भाजपा के लोग प्रयासरत रहते हैं। एक तरफ महिला आरक्षण, महिला सशक्तीकरण, नारी शक्ति वंदन जैसे कानूनों पर बात करना और विपक्षी दल नारी शक्ति विरोधी हैं ऐसा भ्रम पैदा करना; वहीं दूसरी तरफ राम रहीम जैसे बलात्कारी बाबा का समर्थन करना। अपनी ही दो शिष्याओं के बलात्कार मामले में राम रहीम को अदालत ने २० साल की सजा सुनाई है। मंगलवार की सुबह
रोहतक की जेल से
जब राम रहीम बाबा बाहर निकला, तब उसके काफिले में १५ आलीशान गाड़ियां थीं और मानो उसका विजय जुलूस निकला हो। यह दृश्य समाज और कानून के लिए अशोभनीय तो है ही, पर उससे भी ज्यादा भाजपा के लिए बेशर्मी की हरकत है। केंद्र में भाजपा के गृह मंत्री हैं और हरियाणा में भाजपा की सरकार है। इसलिए गृह विभाग की सहमति के बिना राम रहीम बाबा बाहर नहीं आ सकता। २८ अगस्त २०१७ से बाबा राम रहीम सजा काट रहा है और अब तक १७ बार जेल से अलग-अलग कारणों से बाहर आ चुका है। कुल ४५८ दिन यह बाबाजी भाजपा की कृपा से बाहर रहे। इस साल के ही जनवरी महीने में बाबा को ४० दिन और मई महीने में ३० दिनों की ‘पैरोल’ छुट्टी मंजूर हुई थी। मंगलवार को जेल से बाहर आते ही वह सिरसा स्थित अपने आलीशान आश्रम पहुंचा और मंच पर जाकर ‘सत्संग’ किया। अकाली दल के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा है, ‘बलात्कार जैसे अपराध की सजा काट रहे लोगों को बार-बार मानो ‘पिकनिक’ के लिए ही बाहर छोड़ा जाता है।’ ज्ञानी कुलदीप सिंह की बात सच है। राम रहीम जैसे अपराधियों को सरकारी कृपा से जो विशेष छूट मिल रही है, वैसा ‘फर्लो-पैरोल’ का लाभ दूसरे कैदियों को क्यों नहीं मिलना चाहिए? दिल्ली दंगों के आरोपी (भाजपा के अनुसार) महीनों-महीनों से जेल में हैं। उन्हें जमानत भी नहीं मिलती या मिलने नहीं दी जाती, लेकिन बलात्कार के आरोपी
जब चाहें बाहर आकर
पिकनिक मनाते हैं। यही है क्या आपका कानून और न्याय व्यवस्था? सजा पूरी भुगत चुके अनगिनत कैदी देशभर की कई जेलों में सड़ रहे हैं। कई कैदियों को वकील नहीं मिलते, उनकी हालत की तरफ कोई नहीं देखता। जिला कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लाखों मामले लंबित हैं, लेकिन राम रहीम जैसों की ‘छुट्टी’ की अर्जी तुरंत मंजूर करके उन्हें बाहर निकाल लिया जाता है। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, ऐसा यहां होता नहीं दिखता। राम रहीम को हरियाणा सरकार ने २१ दिन की छुट्टी का रक्षाबंधन तोहफा दिया, लेकिन दूसरे कैदियों की भी तो बहनें हैं। क्या राम रहीम भाजपा का ‘सरकारी भाई’ लगता है? कैप्टन अशोक खरात, राम रहीम, आसाराम बापू जैसे कई विवादित बाबाओं से एक ही समय में भाजपा का रिश्ता होना कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह विकृति ही उनका हिंदुत्व और राष्ट्रीयता है। बलात्कार के मामले में सजा काट रहे राम रहीम को विशेष छूट देकर भाजपा अगर उसके समर्थकों का साथ हासिल कर रही है, तो यह भारतीय नारी शक्ति का अपमान है। राम रहीम की तस्वीरें भाजपा अपने मुख्यालय में लगाकर पूजा करे, उसकी आरती उतारे, यह उनका मामला है; लेकिन एक बलात्कारी को प्रतिष्ठा देकर भाजपा द्वारा शुरू किया गया यह ‘गुणगान’ निंदनीय है। भाजपा प्रायोजित राम रहीम की यह ‘पिकनिक’ दरअसल भाजपा का असली चरित्र ही है।

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