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बढ़ती महंगाई पर भड़की `लाडली बहना’…फड़णवीस सरकार पर फूटा गुस्सा… `अपने १,५०० रुपए वापस ले लो, इतने में महीने का राशन नहीं आता!’

-विमल शेलके बोलीं, `मैं ३ हजार रुपए देती हूं, एक महीने का राशन भरकर दिखाओ..!’

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में महंगाई को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। विमल शेलके ने सरकार की आर्थिक सहायता योजना पर सवाल उठाते हुए बढ़ती कीमतों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आज आम परिवार के लिए महीने का किराना जुटाना ही बड़ी चुनौती बन चुका है और ऐसे में सरकार की ओर `लाडली बहन योजना’ से मिलने वाली १,५०० रुपए की सहायता कितनी राहत दे रही है, यह सवाल जनता के बीच खड़ा हो गया है। शेलके ने दावा किया कि बाजार में चीनी करीब ८० रुपए, गुड़ ११० रुपए और मूंगफली १५० रुपए किलो तक पहुंच गई है। उन्होंने इसी महंगाई को मुद्दा बनाते हुए सरकार पर तंज कसा और कहा, ‘आपके १,५०० रुपए वापस ले लीजिए। मैं ३ हजार रुपए देती हूं, लाडली बहनों को किराना भरकर दिखाइए।’
रसोई बेहाल, खर्च बेकाबू!
महंगाई की मार से घरों का बजट बिगड़ रहा है और सरकार की १५०० रुपए की आर्थिक मदद पर सवाल उठ रहे हैं। विमल शेलके नाम की तीखा हमला बोलते हुए पूछा कि जब रोजमर्रा का राशन ही महंगा हो गया है, तो यह राहत आखिर कितनी कारगर है? अब सरकार से जवाब मांगा जा रहा है।
विमल शेलके का यह बयान सीधे तौर पर उस सरकारी मदद की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है, जिसे महिलाओं के लिए आर्थिक सहारे के तौर पर पेश किया जाता है। सवाल यह है कि अगर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ती रहें, तो खाते में आने वाली निश्चित रकम की वास्तविक खरीद क्षमता कितनी रह जाती है? महंगाई का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं है। ग्रामीण परिवारों के सामने खेती की लागत, बिजली, र्इंधन, परिवहन और पशुओं के चारे का खर्च भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में नकद सहायता तत्काल राहत तो दे सकती है, लेकिन क्या वह बढ़ते घरेलू खर्च की भरपाई कर सकती है, यह बड़ा सवाल है।
अब निगाह सरकार के जवाब पर है। क्या वह महंगाई के आंकड़ों के साथ जवाब देगी या फिर विपक्ष के हमले को राजनीतिक बयान बताकर खारिज कर देगी? फिलहाल जनता के लिए सबसे बड़ा मुद्दा यही है, राहत खाते में आ रही है, लेकिन रसोई में क्यों नहीं दिख रही?

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