महाराष्ट्र में इस समय जो ‘नाराजगी’ महानाट्य चल रहा है, उसे गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। उप मुख्यमंत्री शिंदे ने दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की और मुख्यमंत्री फडणवीस और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की शिकायत करते हुए कहा, ‘ये लोग हमारी पार्टी तोड़ रहे हैं। चव्हाण पैसे के दम पर हमारे पदाधिकारियों को खरीद रहे हैं। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’ शिंदे की शिकायत पर अमित शाह ठहाका लगाकर हंस पड़े। शिंदे ने पूछा, ‘साहेब, आप क्यों हंस रहे हैं?’ इस पर शाह ने कहा, ‘कौन किसकी पार्टी तोड़ रहा है? असल में, आपकी पार्टी वही है जिसे हमने, भाजपा ने, तोड़कर बनाया है। आपने तोड़ा। हमने इसे एक पार्टी के रूप में मान्यता दी, इसलिए आप ‘पार्टी’ वगैरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। आपकी जो भी पार्टी है, वह भाजपा की ही एक शाखा है। शिंदे जी, कृपया क्रॉनोलॉजी समझिए। आप पैसे बांटकर लोगों को बांटने में माहिर हैं। अगर चव्हाण ऐसा कर रहे हैं, तो बुरा मानने की कोई बात नहीं है। मुंबई जाकर रवींद्र चव्हाण के साथ बैठकर चाय पीजिए। बेवजह की शिकायतें लेकर दिल्ली मत आइए।’ शाह और शिंदे के बीच यह संवाद मनोरंजक है। अब शिंदे कहते हैं, ‘उनका दिल्ली दौरा सफल रहा और श्री शाह ने उनका सम्मान बनाए रखने का वचन दिया।’ यह शिंदे का दिखावा है। स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने शिंदे के कई लोगों को तोड़ लिया। यह गठबंधन की राजनीति को शोभा नहीं देता। शिंदे और उनके लोग चिंतित हैं कि अगर भारतीय जनता पार्टी ऐसा करती है तो हमारी पार्टी नहीं बचेगी। रवींद्र चव्हाण ठाणे जिले से हैं। जब से रवींद्र चव्हाण भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने हैं, उन्होंने
ठाणे जिले में
शिंदे गुट को फोड़ लिया। जिन लोगों को शिंदे ने पांच से पच्चीस लाख रुपये में खरीदा था, उनमें से कई लोगों को चव्हाण ने होल-सेल में खरीद लिया। यानी चव्हाण ने शिंदे का मार्ग ही अपनाया है। गुरुवार को ठाणे में शिंदे के कार्यकर्ताओं की भाजपा पदाधिकारियों ने जमकर धुनाई की। चव्हाण के लोगों ने चेतावनी दी, ‘हम से पंगा लोगे तो ऐसी ही धुनाई होगी।’ और ठाणे में शिंदे गुट को शायद गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया। हालांकि शिंदे इन वाकयों से काफी नाराज हैं लेकिन उनकी इस नाराजगी को कोई भाव देने को तैयार नहीं। शिंदे की दिल्ली यात्राओं की भी कोई अहमियत नहीं रही है। भाजपा का मूल स्वभाव रहा है, इस्तेमाल करो और फेंक दो या फिर निगल कर पस्त कर दो। जब शिंदे और उनके ४० विधायक अलग हुए तो भाजपा ने शिंदे को एक मजबूत, महान नेता होने का दिखावा किया। उन्होंने धनुष-बाण और शिवसेना शिंदे को सौंप दी। इसीलिए शिंदे ऐसा व्यवहार करने लगे थे जैसे खुद ही शिवसेनाप्रमुख हों। अब जब भाजपा ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है तो इन सबकी नींद हराम हो गई है। महाराष्ट्र में शिंदे की मुख्यमंत्री फडणवीस से नहीं बन रही है। उनका अजीत पवार से विवाद चल रहा है। इसमें गणेश नाईक और रवींद्र चव्हाण दोनों ने शिंदे गुट को उनकी औकात में ला दिया है। ठाणे में संजय केलकर जैसे पुराने भाजपा नेता शिंदे को पूछने को तैयार नहीं हैं। भाजपा ने अब स्वबल का नारा दिया और जहां भी शिंदे के विधायक चुने गए, वहां दूसरी पार्टियों के मजबूत लोगों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। यानी अगले विधानसभा भाजपा
शिंदे के बिना ही चुनाव
लड़ेगी, यह स्पष्ट है। भाजपा ने एक ‘पार्टी’ बनाई और अब भाजपा ने खुद इसे नष्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह स्पष्ट है कि शिंदे गुट के कम से कम ३५ विधायक भाजपा में शामिल होंगे। भाजपा ने ‘ऑपरेशन लोटस’ के जरिए बालासाहेब ठाकरे की मूल शिवसेना को तोड़ा था। शिंदे उस विभाजन के सूत्रधार थे। अब दूसरे ‘ऑपरेशन लोटस’ में शिंदे गुट को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। शिंदे की पार्टी एक बुलबुला है। अमित शाह ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के साथ मिलीभगत करके शिंदे को शिवसेना पार्टी और धनुष-बाण का चुनाव चिह्न दिया। जिस तलवार से शिंदे ने शिवसेना को तोड़ा था, अब उसी का इस्तेमाल उन पर हमला करने के लिए किया जा रहा है। शिंदे एक ठेकेदार सेना चलाते हैं। इसलिए जिस तरह गुड़ की ढेरी पर चींटियां चिपकती हैं इस तरह लोग शिंदे से चिपके हुए हैं। भाजपा के रवींद्र चव्हाण ने शिंदे के सामने गुड़ का एक बड़ा ढेर रख दिया है। शिंदे की चींटियां भाजपा के ढेर पर चढ़ गर्इं। शिंदे ने जो बोया था वही उगा है। भाजपा को शिंदे की जरूरत नहीं है। शिंदे को उनकी जगह दिखाने के लिए ‘लोटस’ कार्यक्रम शुरू किया गया है। अमित शाह इस शिकायत पर हंसे बिना नहीं रह पाए कि ‘रवींद्र चव्हाण ने भारी रकम देकर हमारे लोगों को तोड़ा’। जो शिंदे खुद टूटे हैं, वे लोगों को तोड़ने की चिंता व्यक्त करें, यह एक बड़ा मजाक है। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ दलों का ‘नाराजगी’ नाट्य जारी रहेगा। इस ‘नाराजगी’ नाट्य का तीसरा अंक अब शुरू हो गया है और इस अंक के अंत की घंटी बज रही है। नाराज शिंदे को भाजपा कौड़ी की कीमत देने को तैयार नहीं है। ‘नाराजगी’ के महानाट्य का ढहना तय है!
