-ससुर ने बंदूक की नोक पर किया बलात्कार
-४ दिन तक एफआईआर के लिए भटकती रही महिला दारोगा
-महिला दारोगा का आरोप है कि वह पिछले चार दिनों से लगातार लखनऊ के पारा थाने के चक्कर काट रही थी, लेकिन खाकी वर्दी का सम्मान करने के बजाय स्थानीय पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
जान से मारने की कोशिश
क्राइम की कड़ियों में वारदात यहीं नहीं रुकी। पीड़िता के मुताबिक, १९ जनवरी २०२६ को उसके पति ने उसकी मर्जी के खिलाफ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। जब महिला दारोगा ने इसका कड़ा विरोध किया तो पति और ससुराल वालों ने मिलकर उसे जबरन चूहे मारने वाला जहर खिला दिया और तड़पता हुआ कमरे में बंद कर दिया।
लखनऊ में इंसाफ की सबसे बड़ी विडंबना सामने आई है। एक महिला दारोगा ने अपने ही ससुर पर रेप का आरोप लगाया, लेकिन एफआईआर लिखवाने के लिए उसे ४ दिन तक पुलिस दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। जिस महिला ने कानून की वर्दी पहन रखी है, वही जब न्याय के लिए दर-दर भटके तो आम महिलाओं की हालत का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं। सवाल सिर्फ एक दारोगा का नहीं, सवाल उस सिस्टम का है जो महिलाओं की सुरक्षा के दावे तो करता है, लेकिन शिकायत दर्ज करने में ही दीवार बन जाता है।
मूल रूप से लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता वर्तमान में प्रयागराज जिले में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात है। पीड़िता की शादी १४ फरवरी २०२५ को शुभम सिंह नाम के युवक के साथ हुई थी। पीड़िता का आरोप है कि उसका पति ठाकुर समाज से है और यह एक इंटर-कास्ट मैरिज थी। शादी के बाद से ही ससुराल वाले उसे लगातार जातिसूचक शब्द कहकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। उसे आए दिन अपमानित किया जाता था और दारोगा की नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता था। महिला दारोगा का आरोप है कि उसकी नौकरी न छोड़ने और विरोध करने पर ससुर ने घर में मौजूद लाइसेंसी हथियार की नोक पर उसे जान से मारने की धमकी दी और उसके साथ जबरन रेप की वारदात को अंजाम दिया।
