– दीपदान के साथ कार्तिक मास का शुभारंभ
-महंत बलवीर गिरि ने मां गंगा की पूजा-अर्चना कर लोककल्याण की कामना की
-बाघंबरी मठ में कार्तिक पूर्णिमा तक प्रतिदिन जलेगा आस्था का दीप
राजेश सरकार / प्रयागराज
धर्म, आस्था और भक्ति की पावन त्रिवेणी संगम नगरी प्रयागराज में शरद पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धा का अनुपम दृश्य देखने को मिला। बाघंबरी मठ के महंत बलवीर गिरि जी महाराज ने संगम तट पर मां गंगा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर 1,100 दीपों का दीपदान किया। दीपों की रोशनी के बीच मां गंगा के प्रति श्रद्धा निवेदित करते हुए उन्होंने लोककल्याण की कामना की। इस धार्मिक आयोजन के साथ कार्तिक मास के अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ।
शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर संगम तट पर दीपदान ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मां गंगा के चरणों में दीप अर्पित कर महंत बलवीर गिरि जी महाराज ने सनातन धर्म की प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया। मान्यता है कि दीपदान अंधकार से प्रकाश, निराशा से आशा और अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ने का प्रतीक है। कार्तिक मास में इस परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा तक मठ में प्रतिदिन होगा दीप प्रज्ज्वलन
कार्तिक मास के आगमन पर बाघंबरी मठ परिसर में भी दीप प्रज्ज्वलित किए गए। पूरे महीने प्रतिदिन शाम को दीप जलाकर पूजा-अर्चना और दीपदान की परंपरा निभाई जाएगी। यह धार्मिक क्रम कार्तिक पूर्णिमा तक जारी रहेगा। दीपों की यह अविरल ज्योति श्रद्धालुओं को धर्म, साधना और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का संदेश देगी।
हिंदू धर्म में कार्तिक मास को पुण्य, भक्ति और साधना का विशेष महीना माना गया है। इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, दीपदान और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने में श्रद्धापूर्वक किया गया दीपदान पुण्यफल प्रदान करता है। संगम नगरी में 1100 दीपों के अर्पण के साथ शुरू हुआ यह धार्मिक आयोजन इसी आस्था और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक बना।
