मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : जंग का काउंटडाउन शुरू!..पूरे खित्ते में खलबली

मुस्लिम वर्ल्ड : जंग का काउंटडाउन शुरू!..पूरे खित्ते में खलबली

सूफी खान

फरवरी २०२६ में जिस अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर मिडिल ईस्ट को जंग की आग में झोंक दिया था, अब वही खौफजदा नजर आता है। मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बताया जा रहा है कि २३ नवंबर को तैयार किए गए अमेरिकी इंटेलिजेंस मेमोरेंडम में विदेश मंत्री मार्को रूबियो को आगाह किया गया है कि ईरान खित्ते में मौजूद अमेरिकी अफसरों और ओहदेदारों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है। इसी खतरे को देखते हुए सऊदी अरब, यूएई, लेबनान, कतर और जॉर्डन समेत कई मुल्कों में अमेरिकी डिप्लोमेटिक मिशनों से गैर-जरूरी स्टाफ और उनके परिवारों को वापस बुलाने का पैâसला किया गया है। हालांकि, मेमोरेंडम में किसी खास टार्गेट का नाम नहीं दिया गया है, न हमले का तरीका बताया गया है और न ही इसका कोई सबूत पेश किया गया है। लेकिन इतना जरूर है कि वॉशिंगटन में हलचल मची हुई है। खास बात यह है कि मिडिल ईस्ट या वेस्ट एशिया में अमेरिका का दबदबा माना जाता है, बावजूद इसके वह ईरान के किसी भी एक्शन से खौफजदा नजर आ रहा है। इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी एंबेसी के कर्मचारियों और उनके परिवारों को तुरंत सऊदी अरब छोड़ने का हुक्म दे दिया था। जिस तरह हूतियों से उलझकर सऊदी अरब की मुश्किलें बढ़ रही हैं, उससे अमेरिका को खतरा पैदा हो गया है कि कहीं हूती उसके ठिकानों पर हमले न शुरू कर दें।
अभी तक अमेरिका-सऊदी अरब-हूती संघर्ष में अमेरिका सीधे तौर पर नहीं उतरा है और यमन में हूतियों से भिड़ने का उसका पुराना अनुभव बहुत ही खराब रहा है। जंग करीब-करीब तय है। फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की तरह एक बार फिर ईरान पर हमला कर सकता है या फिर ईरान समझौते पर राजी हो जाए-दो ही सूरतें हैं। ट्रंप ने होर्मुज में जहाजों पर हमलों और पर्शियन गल्फ में बारूदी सुरंगें बिछाने को लेकर ईरान पर इल्जाम लगाए। लेकिन इन इल्जामों को साबित करने के लिए उनके बयान में कोई तफ्सील नजर नहीं आई। करीब आठ महीने से जारी जंग, र्इंधन की बढ़ती कीमतों और अमेरिका में ३ नवंबर के मिडटर्म चुनाव के दबाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप की मुश्किल यह है कि ईरान के खिलाफ जंग बढ़ाने की धमकी देना तो आसान है, लेकिन उसके नतीजों और कीमत से बचना आसान नहीं है।
इस बीच, तुर्की में अमेरिकी एंबेसडर और सीरिया-इराक में अमेरिका के स्पेशल एन्वॉय टॉम बराक ने दावा किया है कि नए हफ्ते में ईरान पर हमला हो सकता है। बराक से जब एक इंटरव्यू में पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान पर दोबारा हमला करेगा, तो उन्होंने साफ लफ्जों में जवाब दिया कि बिल्कुल करेगा। इधर, ईरान ने भी दो टूक कह दिया है कि अमेरिकी जंगी जहाजों को फारस की खाड़ी में दाखिल होने की इजाजत अब नहीं दी जाएगी। ट्रंप का फारस की खाड़ी में अपनी फौजी ताकत पहुंचाने का ख्वाब सिर्फ ख्वाब बनकर रह जाएगा। ईरान किसी भी सूरत में अमेरिकी जंगी जहाजों को अपने करीब आने नहीं देगा। सवाल यह है कि ट्रंप कई बार बयान देते रहे हैं कि ईरान की फौजी ताकत और उसकी सलाहियत खत्म कर दी गई है, तो फिर अमेरिका बार-बार परमाणु कार्यक्रम का बहाना लेकर ईरान पर हमले की धमकी क्यों देता है। सच तो यह है कि अमेरिका अपनी फौजी ताकत को दुनिया के सामने जितना बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है, मिडिल ईस्ट में उसे उतनी ही रुकावटों का सामना करना पड़ता है।

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