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तीन एजेंसियों की खींचतान में पुल की बलि!

-जंग और कचरे के बीच दम तोड़ रहा ऐतिहासिक पुल
– १९७३ के ऐतिहासिक पुल को जंग के हवाले कर सोया प्रशासन
– एमएसआरडीसी, पीडब्ल्यूडी और मनपा के बीच जिम्मेदारी का घमासान

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई और नई मुंबई को जोड़ने वाला ऐतिहासिक ठाणे क्रीक ब्रिज-१ आज सरकारी विभागों की उदासीनता और आपसी जिम्मेदारी के विवाद का शिकार बन गया है। वर्ष १९७३ में शुरू हुआ यह पुल कभी मुंबई से नई मुंबई पहुंचने का प्रमुख मार्ग था। लेकिन आज इसकी हालत जर्जर हो चुकी है। पुल के ढांचे पर जंग लग रही है, आसपास झाड़ियां उग आई हैं और कचरे का अंबार जमा हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि इसकी देखरेख और भविष्य को लेकर तीन सरकारी एजेंसियों के बीच जिम्मेदारी का विवाद बना हुआ है। पुराने पुल के बंद होने और उसकी जर्जर हालत के बावजूद उसके स्वामित्व तथा रखरखाव का सवाल अब तक सुलझ नहीं पाया है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और नई मुंबई मनपा के बीच यह तय करने को लेकर विवाद है कि पुल की जिम्मेदारी किसकी है।
ऐतिहासिक महत्व रखने वाला सार्वजनिक ढांचा उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। पुल की संरचनात्मक स्थिति खराब होने के कारण उसकी सुरक्षा और भविष्य को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुंबई और नई मुंबई के बीच संपर्क मजबूत करने के उद्देश्य से बनाए गए इस पुल की जगह अब दो नए पुलों ने ले ली है, लेकिन पुराने पुल को लेकर स्पष्ट निर्णय का अभाव प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। कोई सरकारी विभाग इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। क्या सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण सार्वजनिक संपत्ति को यूं ही बर्बाद होने दिया जाएगा। इस पुल का भविष्य तय करने के लिए संबंधित एजेंसियों को स्वामित्व का विवाद सुलझाकर तकनीकी जांच के आधार पर स्पष्ट कार्ययोजना बनाने के लिए लापरवाही बरती जा रही है।

 

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