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संपादकीय : भारतीय सेना से गद्दारी!.. असली देशद्रोही कौन?

प्रधानमंत्री मोदी की सरकार जनता को मूर्ख समझ रही है। देश से कई महत्वपूर्ण बातें छुपा रही है, लेकिन उनके ग्रह फिरने से रोज ही उनका पर्दाफाश हो रहा है। चीन की सेना अरुणाचल की सीमा पार कर छह से सात किलोमीटर अंदर घुस आई है और भारत-चीन सेना के बीच झड़पें जारी हैं, आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर द्वारा इस बात का खुलासा करते ही देशभर में खलबली मच गई। चार महीनों से भारत-चीन सीमा पर झड़पें जारी हैं और सरकार इस जानकारी को गोपनीय रखने का प्रयास कर रही है। चीनी सेना अरुणाचल की सीमा में कितनी घुसी है, तो असाफिला इलाके में चीनी सैनिकों ने नियंत्रण रेखा से ७ किलोमीटर के अंतर पर अपनी छावनियां बना ली हैं। चीन की सेना अरुणाचल को निगल रही है, इस बात की चेतावनी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण में एक साल पहले दी थी, तब गांधी भारतीय सुरक्षा व्यवस्था के बारे में झूठी जानकारी फैला रहे हैं, ऐसा स्यापा मोदी, शाह और राजनाथ सिंह ने मचाया था और गांधी को ही कटघरे में खड़ा किया गया। अरुणाचल के दुर्गम इलाकों में रहने वाले आदिवासी समाज ने भी चीन की सेना के घुसने की जानकारी दी थी। तब भी उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया गया। अरुणाचल के कुछ युवाओं ने चीन की घुसपैठ को लेकर `रील’ बनाकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू की। `अब हम इसके आगे चीन में ही मिलेंगे’ ऐसा बयान उस रील से सामने आया। तब भी यह चीनी प्रोपेगेंडा का हिस्सा होने की बात सरकार की ओर से कही गई और
विषय से भटका दिया
गया। अब इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस के महानिदेशक ने ही अरुणाचल सीमा पर भारत-चीन झड़पें शुरू होने और चीन द्वारा वहां घुसपैठ किए जाने का सच बयां किया है। राजस्थान के अलवर स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण महाविद्यालय के कार्यक्रम में वे बोल रहे थे। यानी यह एक आधिकारिक कार्यक्रम था। चीन सैन्य ताकत में हमसे बहुत अत्याधुनिक और आगे है। ड्रोनों के कारण पारंपरिक युद्ध में काफी बदलाव आया है, यह भी आईटीबीपी के महानिदेशक ने बताया। महानिदेशक ने अरुणाचल की सीमा का कड़वा सच सामने रखा, लेकिन उनके बयान से खलबली मचते ही उनके भाषण का वीडियो ही आधिकारिक साइट से हटा दिया गया। पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के आत्मकथन `फोर स्टार्स ऑफ डिस्टिनी’ पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। क्यों? तो इसलिए कि इसमें २०२० की भारत-चीन सीमा (लद्दाख-गलवान) की घटनाओं और अग्निपथ योजना का बेबाक विश्लेषण किया गया है। चीन की घुसपैठ को लेकर भारतीय रक्षा विभाग कितना लापरवाह है, यह इस किताब में स्पष्ट किया गया है। यानी ३१ अगस्त २०२० की रात जब चीन के टैंक भारत की ओर आगे बढ़ रहे थे, तब सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से कार्रवाई के बारे में स्पष्ट आदेश मांगे थे। सिंह ने प्रधानमंत्री से बात करके, `जो उचित समझो, वो करो,’ ऐसा अधर में लटका हुआ संदेश दिया, ऐसा जनरल नरवणे ने अपनी किताब में लिखा है। नरवणे ने इस प्रसंग को `हॉट पोटैटो’ यानी कठिन जिम्मेदारी बताया है। चीन के सामने
भारतीय नेतृत्व कितना कमजोर
है, चीन के घुसने पर भी वे कोई फैसला नहीं ले पा रहे हैं, यह स्पष्ट है। देश सुरक्षित हाथों में नहीं है, यह इसका प्रमाण है। भारत के `एसआईआर’ मामले में हटाए गए १३ करोड़ मतदाता घुसपैठिए हैं और राहुल गांधी घुसपैठियों को मतदान का अधिकार देना चाहते हैं, ऐसा आरोप अमित शाह ने लगाया है; लेकिन चीन लद्दाख और अरुणाचल में घुस चुका है, इस पर शाह बोलने को तैयार नहीं हैं। सोनम वांगचुक ने जब लद्दाख में चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाया, तो मोदी सरकार ने उन्हें देशद्रोही घोषित कर दिया। देश के पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने जब अपनी किताब में सच सामने रखा, तब भाजपा ने जनरल नरवणे को भी देश का दुश्मन करार दिया। अब आईटीबीपी के महानिदेशक को भी देश का दुश्मन ठहराया जाएगा। चीन की सेना अरुणाचल में घुसपैठ कर रही थी और उसी समय दिल्ली के `ब्रिक्स’ सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की खातिरदारी में डूबे हुए थे। भारत के सेनानी चीनी सैनिकों के साथ झड़प कर रहे थे और दिल्ली में यह छिछोरापन चल रहा था। हमारे सैनिकों के जख्मों पर नमक छिड़कने का यह प्रकार है। प्रधानमंत्री मोदी ने हर कठिन समय में अपने सैनिकों का राजनीतिक इस्तेमाल किया और बाद में उन्हें `अकेला’ छोड़ दिया। प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने न तो पुलवामा की जिम्मेदारी ली, न पहलगाम नरसंहार की और न ही अब अरुणाचल में हुई चीनी घुसपैठ की। भारत की जमीन चीन की झोली में डालने वाले प्रधानमंत्री मोदी को अब हटाना ही होगा!

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