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नेता झूठ बोले तो मतदाता ठोकेंगे केस!

-सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; हलफनामे में गलत जानकारी पर सीधे आपराधिक शिकायत
-चुनाव आयोग की मंजूरी जरूरी नहीं

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

चुनाव में बड़े-बड़े दावे और हलफनामे में गलत जानकारी के मामलों में अब उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चुनावी हलफनामे में झूठी जानकारी के उम्मीदवार के खिलाफ आम मतदाता भी सीधे आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके लिए चुनाव आयोग की मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने कर्नाटक हाई कोर्ट के पुराने फैसले को रद्द करते हुए यह महत्वपूर्ण व्यवस्था दी। हाई कोर्ट ने मतदाताओं को चुनाव याचिका दाखिल करने का अधिकार तो माना था, लेकिन आपराधिक शिकायत दर्ज कराने का अधिकार नहीं दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस व्याख्या को खारिज कर दिया। जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा १२५ए के तहत अब मतदाता उम्मीदवार के हलफनामे में दी गई जानकारी को लेकर कानूनी कार्रवाई की पहल कर सकते हैं। चुनाव में पारदर्शिता और उम्मीदवारों की जवाबदेही के लिहाज से इस फैसले को अहम माना जा रहा है। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने दलील दी थी कि वह शिकायतों की जांच कर तथ्यों के आधार पर संबंधित एजेंसियों को मामला भेज सकता है। लेकिन अदालत ने शिकायत के लिए आयोग की मंजूरी को अनिवार्य नहीं माना।
यानी चुनावी हलफनामे में कथित झूठ का मामला अब सिर्फ आयोग के भरोसे नहीं रहेगा। हालांकि, शिकायत दर्ज होने का मतलब दोष साबित होना नहीं है। आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही उम्मीदवार की जिम्मेदारी तय होगी।

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