सामना संवाददाता / नई दिल्ली
चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और पहली नवंबर को राहुल गांधी की प्रस्तावित महारैली से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालते हुए शनिवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में लगभग तीन घंटे तक उच्चस्तरीय बैठक की। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में प्रदर्शन, भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा की गई। दिलचस्प बात यह है कि अमित शाह चार साल से अधिक समय बाद दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचे। उनका पिछला दौरा अगस्त २०२२ में हुआ था। ऐसे में विपक्ष के आंदोलन से ठीक पहले उनकी सक्रियता राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।
गृह मंत्रालय ने राजधानी में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की २७३ कंपनियों की तैनाती ३१ अक्टूबर तक बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील इलाकों में गश्त, खुफिया निगरानी और संभावित प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की तैयारियों पर जोर दिया है। बैठक में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, मादक पदार्थों की तस्करी तथा विदेशों से संचालित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों ने हाल के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की प्रतिक्रिया और भीड़ प्रबंधन पर जानकारी दी।
इस बीच दिल्ली पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जुलाई में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग और अक्टूबर में एसआईआर विरोधी प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तारियों तथा हिरासत में लिए जाने की घटनाओं को लेकर विपक्ष और छात्र संगठनों ने आपत्तियां जताई हैं।
सुरक्षा के नाम पर सख्ती तो नहीं?
कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। उनका आरोप है कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची में अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और प्रमाणिकता अलग विषय है। दिल्ली पुलिस ने १ नवंबर की रैली की अनुमति दी है। ऐसे में अब असली कसौटी यह होगी कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर शांतिपूर्ण विरोध का संवैधानिक अधिकार प्रभावित न हो। सवाल यह भी है कि हजारों सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में सरकार प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी या सख्ती ही प्राथमिकता बनेगी।
राहुल की हुंकार…`महारैली होकर रहेगी!’
मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राहुल गांधी ने एलान किया है कि वोट चोरी के मुद्दे पर वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने १ नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में शामिल होने के लिए देशवासियों से अपील की है। उन्होंने कहा है कि यह महारैली होकर ही रहेगी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि मतदाता सूचियों से नाम काटे जाने और नियम-कानून तोड़े जाने के आरोपों को चुपचाप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर सवाल उठाने वालों को लाठियों का सामना करना पड़ा।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की `जन अदालत’
मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। `इंडिया’ गठबंधन ने ३० अक्टूबर को दिल्ली के अशोक होटल में प्रतीकात्मक `पब्लिक इम्पीचमेंट’ कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। इसके बाद एक नवंबर को दिल्ली चलो मार्च प्रस्तावित है, जिसका समापन रामलीला मैदान में होगा। विपक्ष आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सवाल उठा रहा है। हालांकि, यह प्रतीकात्मक कार्यक्रम संवैधानिक महाभियोग की प्रक्रिया नहीं है।
