-११८ किमी नेटवर्क का लक्ष्य, आज भी कई कॉरिडोर अधूरे
-एमएमआरडीए की सुस्त रफ्तार ने मुंबईकरों को इंतजार में रखा
संदीप पांडेय / मुंबई
मुंबई को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने और सफर की रफ्तार बढ़ाने के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए गए। २५ अक्टूबर २०१६ को ११८ किलोमीटर के एलिवेटेड मेट्रो नेटवर्क की योजना सामने थी। लक्ष्य था अगले ३–४ वर्षों में परियोजनाओं को आगे बढ़ाना, लेकिन २५ अक्टूबर २०२६ तक भी कई महत्वपूर्ण कॉरिडोर पूरी तरह चालू नहीं हो पाए। दस साल में मेट्रो का विस्तार तो हुआ, लेकिन समयसीमा पर परियोजनाएं पूरी करने के दावों की पोल भी खुली।
निर्माण के आंकड़े बड़े, लेकिन यात्री अब भी इंतजार में!
३२.३२ किलोमीटर लंबे मेट्रो-४ कॉरिडोर में अगस्त के अंत तक पियर निर्माण ९५ प्रतिशत और यू-गर्डर का काम ९४ प्रतिशत पूरा बताया गया था। वहीं १५.३१ किलोमीटर लंबे मेट्रो-६ कॉरिडोर में स्टेशन निर्माण ८७.३५ प्रतिशत पूरा था। इसके बावजूद इन आंकड़ों से पूरी यात्री सेवा शुरू होने की पुष्टि नहीं होती। निर्माण के प्रतिशत गिनाने के बजाय एमएमआरडीए को बताना चाहिए कि पूरा कॉरिडोर कब चालू होगा।
दस साल बाद जवाबदेही कौन लेगा?
मेट्रो-२ए और मेट्रो-७ चालू हो चुकी हैं, लेकिन इससे दूसरे कॉरिडोर की देरी पर पर्दा नहीं पड़ सकता। जब समयसीमा चूकती है, तो उसका खामियाजा मुंबईकर ट्रैफिक, धूल, बैरिकेड और रोजाना की परेशानी के रूप में भुगतते हैं।
२३ किमी के कॉरिडोर में सिर्फ ५.७९ किमी चालू!
एमएमआरडीए की ३१ अगस्त २०२६ की रिपोर्ट के मुताबिक, २३.६४३ किलोमीटर लंबे मेट्रो-२बी कॉरिडोर में केवल ५.७९ किलोमीटर हिस्सा ही चालू था। यानी लगभग ७५.५ प्रतिशत मार्ग पर सेवा शुरू नहीं हुई थी। ठेकेदारों के खराब प्रदर्शन के कारण दोबारा निविदा की नौबत आई। जनहित याचिकाओं और हवाई अड्डे से जुड़ी मंजूरियों की अड़चनें भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं, लेकिन यहां सवाल यह है कि इन समस्याओं का समय रहते समाधान क्यों नहीं निकाला गया?
