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मुंबई अंडरवर्ल्ड में हथियारों का बदला दौर

 -दाऊद से बिश्नोई गैंग तक, गोलियों की गूंज अलग-अलग
-‘डी’ कंपनी के शूटरों की थी पसंद स्टार पिस्तौल और ग्लॉक पिस्तौल

फिरोज खान / मुंबई

मुंबई अंडरवर्ल्ड के इतिहास में दाऊद इब्राहिम के दौर से लेकर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह तक अपराध की दुनिया में हथियारों का इस्तेमाल बदलता जा रहा है। १९८० और १९९० के दशक में मुंबई में गैंगवॉर, सुपारी लेकर हत्या और जबरन वसूली की घटनाओं के दौरान अलग-अलग प्रकार की पिस्तौलों और स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल होता था। आज बिश्नोई गिरोह से जुड़े गोलीबारी के मामलों में भी आधुनिक हथियारों के नाम सुर्खियों में हैं।
दाऊद इब्राहिम के गिरोह शार्पशूटर ९ एमएम स्टार पिस्तौल, ग्लॉक पिस्तौल और एके-४७ जैसी राइफलों का इस्तेमाल करते थे। दूसरी ओर, लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े हालिया मामलों में भी गोलीबारी के लिए इस्तेमाल किए गए हथियारों को लेकर जांच होती रही है। बाबा सिद्दीकी से लेकर अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में तुर्किये में निर्मित जिगाना पिस्तौल के इस्तेमाल की बात सामने आई है।
‘डी’ कंपनी के शार्प शूटरों के हथियार
-मुन्ना झिंगड़ा : छोटा शकील के निर्देश पर काम करने वाला शूटर। १९९७ में उसने स्टार पिस्तौल के जरिए छोटा राजन और अरुण गवली के सहयोगियों को निशाना बनाया।
-फिरोज कोंकणी : दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से जुड़ा कुख्यात शूटर था। उसने २५ अगस्त १९९४ को बीजेपी नेता रामदास नायक की हत्या में एके -४७ असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल किया था।
-रामदास रहाणे : दाऊद का करीबी सहयोगी और शूटर था। २०१८ में गिरफ्तारी के समय उसके घर से स्टार पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए थे।
-सदा पावले उर्फ सदा मामा : गवली गिरोह का पुराना शूटर था। २६ सितंबर १९९७ को घाटकोपर में पुलिस मुठभेड़ के दौरान सदा पावले के पास एके -५६ राइफल मिली थी।

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