मुख्यपृष्ठस्तंभदिल्ली लाइव : वोटर लिस्ट पर संग्राम, रामलीला मैदान में हुंकार!

दिल्ली लाइव : वोटर लिस्ट पर संग्राम, रामलीला मैदान में हुंकार!

अरुण कुमार गुप्ता

वोट का अधिकार सवालों के घेरे में हो, मतदाता सूची से नाम कटने के आरोप उठ रहे हों और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष सवाल खड़े कर रहा हो, तो जवाब सिर्फ रैली से नहीं, तथ्यों और पारदर्शिता से देना होगा। कांग्रेस ने अब इसी मुद्दे पर दिल्ली में अपनी ताकत दिखाने की तैयारी तेज कर दी है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सांसदों को ३० अक्टूबर से १ नवंबर तक दिल्ली में मौजूद रहने को कहा है। १ नवंबर को रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली प्रस्तावित है। सवाल यह है कि यह शक्ति प्रदर्शन मतदाता सूची की कथित गड़बड़ियों पर ठोस जवाबदेही तय कराने की दिशा में कितना आगे बढ़ेगा? रिपोर्टों के अनुसार, खड़गे ने कांग्रेस सांसदों को तीन दिनों तक राजधानी में रहने का निर्देश दिया है। पार्टी का उद्देश्य मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रहे विरोध को संगठित रूप देना है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के अन्य दलों को भी इस अभियान में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों से १ नवंबर की रैली में भाग लेने की अपील की है। उनका आरोप है कि मतदाता सूचियों से नाम हटाए गए और नियमों का उल्लंघन हुआ। ये कांग्रेस के आरोप हैं; इनकी व्यापकता और सत्यता का आकलन संबंधित निर्वाचन रिकॉर्ड और आधिकारिक जवाबों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विपक्ष की आपत्ति केवल नामों में बदलाव तक सीमित नहीं है। कांग्रेस चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठा रही है। विपक्ष की मांग है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी हो और जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी तथा सुधार का उचित अवसर मिले।
चुनाव आयुक्त के खिलाफ ‘जनता की अदालत’!
मतदाता सूची पर उठे सवालों ने अब राजनीतिक टकराव का नया मोर्चा खोल दिया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की तैयारी की है। ३० अक्टूबर को दिल्ली के अशोक होटल में प्रतीकात्मक ‘जन-महाभियोग’ और १ नवंबर को रामलीला मैदान में ‘दिल्ली चलो’ मार्च का कार्यक्रम घोषित किया गया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस अभियान की जानकारी दी है। गठबंधन ने बड़ी संख्या में लोगों के जुटने का दावा भी किया है। लेकिन इस सियासी लड़ाई के केंद्र में कुछ सीधे सवाल हैं। मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है? नाम हटाए जाने की शिकायतों का निपटारा कैसे हो रहा है? और जिन मतदाताओं को लगता है कि उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं, उन्हें न्याय पाने का कितना आसान रास्ता उपलब्ध है? विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर आरोप लगा रहा है। दूसरी ओर, इन आरोपों को साबित करने के लिए दस्तावेज, प्रमाणित आंकड़े और संबंधित मामलों की जांच जरूरी है। प्रतीकात्मक महाभियोग संवैधानिक रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की औपचारिक प्रक्रिया नहीं है; वास्तविक हटाने की प्रक्रिया संसद में निर्धारित संवैधानिक प्रावधानों के तहत ही होती है।

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