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अमित शाह के इशारे के बाद ‘ऑपरेशन लोटस’ हुआ शुरू! …फडणवीस ने शुरू की दोनों ‘बैसाखियों’ को किनारे करने की मुहिम

रामदिनेश यादव / मुंबई
पिछले कई दिनों से महायुति में जबरदस्त अंदरूनी तनाव चल रहा है। इसी बीच अमित शाह के इशारे के बाद राज्य में ‘ऑपरेशन लोटस’ शुरू हो गया है। इसके तहत अपने सहयोगी गुटों में ही भाजपा ने तोड़-फोड़ शुरू कर दी है। इससे शिंदे और दादा गुट दोनों परेशान हो गए हैं।
बताया जाता है कि भाजपा की दमनकारी नीतियों से एकनाथ शिंदे गुट की बेचैनी बढ़ गई है। हालात ऐसे बदल गए हैं कि अब इनके भीतर की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। शिंदे गुट के मंत्रियों ने भाजपा पर उन्हें खत्म करने की साजिश का आरोप लगाते हुए बगावती रुख अख्तियार कर लिया है। सीएम फडणवीस ने भी शिंदे के सामने ही उनके मंत्रियों को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि ‘जो बोया है, वही पाओगे।’ आखिर दोनों के बीच मंत्रालय में हुई वैâबिनेट की बैठक के बाद भिड़ंत की नौबत क्यों आई? ऐसा सवाल उठने लगा है।
इस बारे में बताया जा रहा है कि भाजपा के केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने फडणवीस को कुछ दिनों पहले कहा था कि प्रदेश की अगली सरकार बैसाखियों के सहारे नहीं, अकेले दम पर होगी। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि शाह के उसी आदेश को मानते हुए सीएम फडणवीस राज्य में अपनी सरकार की दोनों बैसाखियों शिंदे गुट और अजीत पवार गुट की सफाई के लिए निकल पड़े हैं। प्रदेश की राजनीति में आ रहे मोड़ के बीच राजनीतिक सूत्र दावा कर रहे हैं कि केंद्रीय नेतृत्व के इशारे के बाद महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन लोटस’ फिर से सक्रिय होता दिख रहा है।

भाजपा की तोड़-फोड़ नीति से शिंदे गुट की बढ़ी बेचैनी!

स्थानीय निकायों के चुनावों को देखते हुए भाजपा ने फिलहाल पूरे राज्य में अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने के लिए मेगा-भर्ती अभियान शुरू किया है। इसमें भाजपा अपने सहयोगी दलों को दबाने के लिए दोस्त और दुश्मन दोनों को प्रवेश दे रही है। इतना ही नहीं, शिंदे गुट के मंत्रियों पर निगरानी, विधायकों को फंड नहीं, अधिकार नहीं, उनके कामों में भाजपा का दखल, उनके क्षेत्र में भाजपा की बढ़ती साख आदि ने उन्हें आभास करा दिया है कि अब उनके खात्मे का समय आ गया है। यही वजह है कि शिंदे गुट बेचैन हो गया है।
भाजपा की घेराबंदी से शिंदे गुट की हालत बेहद खराब हो गई है। इसी कारण शिंदे गुट के मंत्रियों ने मंगलवार को मुंबई में हुई वैâबिनेट बैठक का ही बहिष्कार कर दिया। दरअसल, राज्य मंत्रिमंडल बैठक से पहले शिंदे गुट की प्री-वैâबिनेट बैठक हुई। उसी में शिंदे गुट ने सीएम के घेराव का पैâसला ले लिया था। इस घटना से यह साफ हो गया कि महायुति में ऊपर से भले ही सब ठीक दिख रहा हो, लेकिन अंदर से बड़ी भयंकर जंग शुरू है। आगे बड़े धमाके होने के संकेत मिल रहे हैं।
गद्दारों को फटकारा
कैबिनेट बैठक खत्म होने के बाद शिंदे गुट के सभी मंत्री मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कक्ष में पहुंचे। यहां शिंदे गुट के मंत्रियों ने भाजपा की ‘तोड़-फोड़’ राजनीति को लेकर कड़ी नाराजगी जताई।

‘चोर मचाए शोर!’… आदित्य ठाकरे का तंज
पता चला है कि ‘मिंधे टोली’ के मंत्रियों ने मंत्रिमंडल की बैठक का बहिष्कार किया। वे गए ही नहीं। क्यों? उनका कहना है कि उनका गुट तोड़ा जा रहा है। इसे ही कहते हैं चोर मचाए शोर! अपने स्वार्थ के लिए राज्य की वैâबिनेट बैठक का बहिष्कार करना महाराष्ट्र और यहां की जनता का अपमान है। वैâबिनेट की बैठक जनता की समस्याएं सुलझाने के लिए होती हैं, आपके रूठने-मनाने के लिए नहीं। यह वैâसा कामकाज चल रहा है? महाराष्ट्र के लिए यह सब बहुत चिंताजनक है।

शिंदे गुट ने काटी सीएम की मीटिंग से कन्नी
भाजपा की घेराबंदी से शिंदे गुट की हालत बेहद खराब हो गई है। इसी कारण शिंदे गुट के मंत्रियों ने कल मंगलवार को मुंबई में हुई सीएम की बैठक से कन्नी काट ली। दरअसल, इस वैâबिनेट बैठक से पहले शिंदे गुट की प्री-वैâबिनेट बैठक हुई थी। उसी में शिंदे गुट ने वैâबिनेट की बैठक के बहिष्कार का पैâसला ले लिया था।

शिंदे गुट में घबराहट
चर्चा है कि भाजपा आने वाले समय में अपनी दोनों सहयोगी ‘बैसाखियों’ को धीरे-धीरे किनारे कर देगी। उसी रणनीति पर काम शुरू कर दिया गया है। यही वजह है कि शिंदे गुट में घबराहट और असंतोष का माहौल बनने लगा है। महाराष्ट्र के सत्ता गलियारों में फिलहाल एक ही सवाल गूंज रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव तक शिंदे गुट और अजीत पवार गुट का क्या होगा?

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