रोहित माहेश्वरी
समाजवादी पार्टी के अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव २०२२ में मतदाता सूची से १८,००० नाम काटे जाने के मामले में आयोग ने सच्चाई छुपाई और सत्ता के दबाव में बयान दिया। प्रसाद ने कहा कि हमारे नेता अखिलेश यादव द्वारा इस संबंध में दिया गया प्रार्थना पत्र तथ्यात्मक था, लेकिन आयोग ने उसे झूठा ठहराया, जो लोकतंत्र के साथ अन्याय है। उन्होंने इस मामले में वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की। प्रसाद ने कहा कि यह सिर्फ सपा का मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का प्रश्न है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि जिन नामों को काटा गया वे या तो मृतक थे या दोहराव वाले। सपा ने इस जवाब को अस्वीकार कर दिया है और निष्पक्ष जांच पर जोर दिया है।
मैं कभी नहीं भूलूंगा
समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी सरकारी गाड़ियों पर करीब ८ लाख रुपए का ओवरस्पीडिंग चालान काटे जाने को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यालय से यह चालान जमा कर देंगे, लेकिन आम जनता इतनी भारी रकम नहीं चुका सकती। अखिलेश ने आरोप लगाया कि चालान की व्यवस्था भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा चलाई जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने ‘टोटी चोरी’ विवाद को भी याद किया। अखिलेश ने कहा कि यह झूठा आरोप उन पर मढ़ा गया था और इस साजिश में तत्कालीन आईएएस अवनीश अवस्थी की भूमिका रही थी। उन्होंने साफ कहा कि मैं यह मामला कभी नहीं भूलूंगा, एक अखबार ने इस पर स्टिंग भी किया था। अखिलेश ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि उसे जनता और बेटियों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, न कि राजनीतिक प्रतिशोध पर।
भाजपा के मंत्री पद का ऑफर ठुकराया
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि २०१९ के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें भाजपा के नेता अमित शाह के संपर्क में आने के बाद मंत्री पद का प्रस्ताव मिला था। भाजपा में शामिल होने के ऑफर में उन्हें योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री बनने का मौका दिया गया था, लेकिन शिवपाल यादव ने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि उनका मकसद कभी सत्ता या पद नहीं रहा और वह हमेशा समाजवादी विचारधारा के प्रति वफादार रहे हैं। शिवपाल यादव ने यह भी बताया कि मुलायम सिंह यादव के कहने पर उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई थी, जो बाद में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गई।
