जर्मनी में अभिनेत्री और टीवी हस्ती कॉलिएन फर्नांडिस से जुड़े डीपफेक पॉर्न मामले ने फिर तूल पकड़ लिया है। उनके पूर्व पति क्रिश्चियन उल्मेन के खिलाफ नई जांच शुरू की गई है। फर्नांडिस ने आरोप लगाया था कि उनके नाम से फर्जी ऑनलाइन अकाउंट बनाए गए और उन पर एआई से तैयार अश्लील तस्वीरें/वीडियो साझा किए गए। मार्च २०२६ में फर्नांडिस के समर्थन में बर्लिन के ब्रांडेनबर्ग गेट पर १०,००० से अधिक लोग जुटे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि बिना सहमति बनाए गए यौन डीपफेक को स्पष्ट रूप से आपराधिक कृत्य माना जाए। जर्मन सरकार ऐसा विधेयक तैयार कर रही है, जिसके तहत पॉर्नोग्राफिक डीपफेक बनाना और गुप्त रूप से यौन प्रकृति की रिकॉर्डिंग करना अपराध होगा। अभी जर्मनी में मुख्य रूप से ऐसे डीपफेक के प्रसार को अपराध माना जाता है, निर्माण को लेकर कानूनी खामियां हैं। उल्मेन के वकील ने आरोपों को एकतरफा और गलत तथ्यों पर आधारित बताया है तथा कानूनी कार्रवाई की बात कही है। इसलिए इस मामले में अभी आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं और कानूनन उन्हें निर्दोष मानने का सिद्धांत लागू रहेगा। यह मामला सिर्फ एक सेलेब्रिटी विवाद नहीं है, बल्कि एआई युग में निजता, स्त्री गरिमा और डिजिटल अपराधों की नई चुनौती है। आज डीपफेक तकनीक किसी भी व्यक्ति की छवि, आवाज और पहचान का दुरुपयोग कर सकती है। इसलिए यह सवाल अब केवल जर्मनी का नहीं, बल्कि भारत सहित पूरी दुनिया का है कि क्या कानून तकनीक की रफ्तार के साथ चल पाएगा।
