– स्कैनर से रोका जाएगा अवैध कारोबार
सुनील ओसवाल / मुंबई
गोवा का संगीत तो फेमस है ही, अब वहां की शराब भी गाएगी। सरकार ने शराब तस्करी पर रोक लगाने के लिए हर बोतल पर अत्याधुनिक ट्रैकिंग लेबल लगाने का पैâसला कर लिया है। वर्षों से खुलेआम चल रही तस्करी पर कार्रवाई करने में विफल रही व्यवस्था अब इसे रोकने के लिए इस नई तकनीक का सहारा ले रही है। इसके तहत हर बोतल पर कोड लगाया जाएगा जो स्वैâनर के संपर्क में आते ही ‘बिप-बिप’ की आवाज करेगी। इससे शराब के अवैध कारोबार पररोक लगेगी।
बता दें कि गोवा से महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में बड़े पैमाने पर शराब की तस्करी होती है। सस्ती शराब के कारण गोवा लंबे समय से तस्करों के लिए सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। सिंधुदुर्ग, सावंतवाड़ी, बांदा चेकपोस्ट, आंबोली घाट और कर्नाटक सीमा से लगे इलाके तस्करी के प्रमुख मार्ग माने जाते हैं। हर साल करोड़ों रुपए की शराब पकड़ी जाती है, लेकिन इसके बावजूद तस्करी का नेटवर्क लगातार पैâलता ही जा रहा है। अब गोवा सरकार ने हर शराब की बोतल और बॉक्स पर विशेष ट्रैकिंग लेबल लगाने का निर्णय लिया है। दावा किया जा रहा है कि जांच एजेंसियों के स्वैâनर के संपर्क में आते ही यह लेबल ‘बिप’ करेगा और तस्करी तुरंत पकड़ में आ जाएगी। शराब कंपनियों के लिए यह लेबल अनिवार्य किया जाएगा और अगले कुछ महीनों में यह व्यवस्था लागू होने की संभावना है। हालांकि, इस पूरी कवायद पर कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अवैध शराब बिना किसी रिकॉर्ड के तैयार होती है, तब उस पर ट्रैकिंग लेबल कौन लगाएगा?
दूसरे राज्यों से आता है कच्चा माल
हैरानी की बात यह भी है कि गोवा में शराब निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाला अधिकांश कच्चा माल राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से आता है, लेकिन सरकार के पास उसके वास्तविक उपयोग और उत्पादन का ठोस हिसाब तक नहीं है। ऐसे में शराब उत्पादन और बिक्री के आंकड़ों में पारदर्शिता नहीं होने के बावजूद सरकार तस्करी रोकने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, शराब कंपनियों ने फिलहाल पुराने स्टॉक और पुराने लेबल खत्म करने के लिए सरकार से अतिरिक्त समय मांगा है।
