– कांग्रेस संग हाथ मिलाकर तटकरे को दिया झटका
– म्हसला पंचायत, महायुति का समीकरण टूटा
सामना संवाददाता / मुंबई
रायगड की म्हसला नगर पंचायत में सत्ता परिवर्तन ने महायुति के भीतर चल रही खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है। एक तरफ राज्य स्तर पर साथ होने का दावा तो दूसरी तरफ स्थानीय राजनीति में सहयोगी दलों के खिलाफ ‘भीतरघात’ और ‘गद्दारी’ की चर्चा गर्म है। कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर शिंदे गुट ने दादा गुट खासकर सुनील तटकरे को बड़ा राजनीतिक झटका दिया।
१० साल से कायम सत्ता पलटते ही नया विवाद तब खड़ा हो गया, जब नगराध्यक्ष कार्यालय से सुनील तटकरे की तस्वीर हटाकर शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे और ए. आर. अंतुले की तस्वीरें लगा दी गईं। इस पूरे घटनाक्रम ने रायगड की राजनीति में भूचाल ला दिया है और महायुति के भीतर सबकुछ ठीक नहीं होने के संकेत भी दे दिए हैं। कल नगराध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में १७ में से ९ सीटों पर शिंदे गुट को बहुमत मिला। इस जीत के बाद दादा गुट को बड़ा झटका माना जा रहा है। खासकर सुनील तटकरे और अदिती तटकरे के लिए यह राजनीतिक तौर पर बड़ा नुकसान बताया जा रहा है। पिछले दस वर्षों से म्हसला नगर पंचायत पर दादा गुट का एकछत्र शासन था, लेकिन मंत्री भरत गोगावले ने इस सत्ता समीकरण को तोड़ते हुए शिंदे गुट के पक्ष में माहौल तैयार किया। नगराध्यक्ष पद के लिए शिंदे गुट की ओर से जंजीरकर मैदान में थे, जबकि दादा गुट ने सुनील शेडगे को उम्मीदवार बनाया था। आने वाले चुनावों को देखते हुए दादा और शिंदे गुट के बीच राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। इस जीत को शिंदे गुट की ओर से दादा गुट को दिया गया बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। चुनाव परिणाम घोषित होते ही शिंदे गुट और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार जश्न मनाया।
