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‘बिग फैट इंडियन वेडिंग’ पर ट्रंप की मार! …शादियों की रफ्तार धीमी: बाजार पर वैश्विक तनाव का साया

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
भारत में शादी केवल दो लोगों का बंधन नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक उत्सव है। होटल, ज्वेलरी, कपड़े, कैटरिंग, डेकोरेशन, ट्रैवल, मेकअप, फोटोग्राफी और इवेंट मैनेजमेंट, सैकड़ों कारोबार इस एक मौसम से जुड़े रहते हैं। लेकिन इस बार शादी का बाजार कुछ ठंडा दिखाई दे रहा है। वजह घर की नहीं, विदेश की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भारतीय शादियों की चमक पर असर डालना शुरू कर दिया है। जिन परिवारों ने दुबई, अबू धाबी, यूरोप या अन्य विदेशी जगहों पर डेस्टिनेशन वेडिंग की योजना बनाई थी, वे अब खर्च और अनिश्चितता देखकर पीछे हट रहे हैं। फ्लाइट महंगी, होटल बुकिंग कठिन, सजावट का सामान महंगा और अंतर्राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स जटिल हो गया है। नतीजा, कई परिवार अब मेहमानों की सूची छोटी कर रहे हैं या विदेश के बजाय भारत में ही शादी करने का विकल्प चुन रहे हैं।
फूल वालों से लेकर बैंडवालों तक सभी पर दिख रहा असर
यह असर केवल अमीर परिवारों तक सीमित नहीं है। बड़ी शादियों से जुड़े छोटे कारोबारी, फूल वाले, लाइटिंग, डेकोरेटर, बैंड, कैटरर, मेकअप आर्टिस्ट, ट्रैवल एजेंट और फोटोग्राफर सब पर इसका असर पड़ सकता है। भारत का विवाह उद्योग पहले ही लगभग १० लाख करोड़ रुपए के आसपास आंका जा चुका है और इसे खाद्य व किराना के बाद सबसे बड़े उपभोग क्षेत्रों में गिना जाता है। इसलिए यह केवल सामाजिक खबर नहीं, आर्थिक संकेत भी है। वैश्विक राजनीति अब सीधे भारतीय घरों के मंडप तक पहुंच रही है। पहले शादी में खर्च परिवार की हैसियत तय करता था, अब डॉलर, तेल, युद्ध और वीजा नीति भी तय कर रही है कि बारात कितनी बड़ी निकलेगी।

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