राजन पारकर
एडवेंचर स्पोर्ट्स के नाम पर जिंदगी की नीलामी!
आज के इस चमकते-दमकते पर्यटन युग में ‘एडवेंचर’ शब्द को इतना आकर्षक बना दिया गया है कि मानो मौत को सजाकर बाजार में उतार दिया गया हो! पर्यटन के नाम पर चल रहे इस खतरनाक व्यापार को देखकर सवाल उठता है – लोग छुट्टियां मनाने जाते हैं या अपनी अंतिम यात्रा की बुकिंग कराने? पहले लोग तीर्थयात्रा पर जाते समय भगवान का नाम लेते थे, अब राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, क्रूज और ऊंचे झूलों के नाम पर सीधे यमराज के दरबार में पहुंचाए जाते हैं। और विडंबना देखिए, इस पूरे खेल को ‘पैâमिली एंटरटेनमेंट’ का नाम दिया जाता है! क्रूज हो, नदी में राफ्टिंग हो या आसमान में उड़ान – अधिकांश स्थानों पर सुरक्षा नियम केवल विज्ञापनों की सजावट बनकर रह गए हैं। उपकरणों की जांच अधूरी, प्रशिक्षित कर्मचारियों का अभाव, आपातकालीन व्यवस्थाएं गायब लेकिन टिकट की कीमतें ऐसी मानो स्वर्गलोक का विशेष प्रवेशपत्र बेचा जा रहा हो! इन व्यवसायियों की मानसिकता कुछ ऐसी प्रतीत होती है – ‘पर्यटक बच गया तो अगला ग्राहक, मर गया तो भी अगला ग्राहक!’ मानव जीवन की कीमत यहां टिकट के रेट से भी सस्ती कर दी गई है। मुनाफे की भूख इतनी बेशर्म हो चुकी है कि सुरक्षा को खुलेआम दफना दिया जाता है।
जब कोई हादसा होता है, तब आयोजक अपने हाथ झाड़ लेते हैं, प्रशासन गहरी नींद में चला जाता है और परिवार वालों के हिस्से में केवल आंसुओं का समंदर बचता है। जवाब मांगो तो कहा जाता है – ‘आप अपनी जिम्मेदारी पर आए थे!’ वाह रे आधुनिक पर्यटन!
मनोरंजन के नाम पर मौत का जाल, और लोगों की जान पर कमाई का निर्लज्ज कारोबार! ‘यह साहस नहीं, बल्कि पैसों के लिए इंसानी जिंदगियों की खुली नीलामी है। फर्क बस इतना है कि पहले नरबलि देवताओं के लिए दी जाती थी, अब पर्यटन कंपनियों की तिजोरियों के लिए दी जा रही है!’ अब समय आ गया है कि पर्यटक अपनी आंखें खोलें और प्रशासन कठोर कानून लागू करे। अन्यथा ‘छुट्टी’ शब्द शीघ्र ही ‘शोकसभा’ का पर्याय बन जाएगा।
साहस कीजिए, लेकिन विवेक के साथ! क्योंकि आपकी जिंदगी किसी भी पर्यटन कंपनी के मुनाफे से कहीं अधिक मूल्यवान है।
