-आधा दर्जन एसडीएम समेत कई जिला स्तरीय अफसरों को थमाया नोटिस
राजेश सरकार / प्रयागराज
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) को लेकर प्रयागराज का प्रशासनिक अमला किस कदर लापरवाह है, इसकी पोल खुद जिलाधिकारी की औचक जांच में खुल गई है। सूबे में प्रयागराज को प्रथम रैंक दिलाने के दावों के बीच जमीनी स्तर पर शिकायतों के ‘फर्जी निस्तारण’ और कागजी खानापूर्ति का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। बुधवार को जब डीएम मनीष कुमार वर्मा और अपर जिलाधिकारियों ने खुद शिकायतकर्ताओं को रैंडम फोन मिलाकर हकीकत जानी, तो अफसरों के दावों की हवा निकल गई। जांचकर्ताओं ने पीड़ितों को फोन तो किया, लेकिन बिना किसी ठोस समाधान के ही फाइलों को बंद कर दिया। इस घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए डीएम ने कई बड़े अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब-तलब किया है।
फोन घुमाते ही खुली ‘कागजी समाधान’ की पोल
शासन की स्पष्ट गाइडलाइन है कि शिकायत मिलने पर जांच अधिकारी पीड़ित से मोबाइल पर संपर्क कर मौके पर समस्या का गुणवत्तापूर्ण समाधान करेगा। प्रयागराज प्रशासन के मातहतों ने इस आदेश का तोड़ निकाल लिया। उन्होंने संपर्क तो किया, लेकिन शिकायत की मूल समस्या को हल किए बिना ही उसे पोर्टल पर ‘निस्तारित’ श्रेणी में डाल दिया। जब आलाधिकारियों ने सीधे जनता से संवाद किया, तो लोगों ने साफ कहा कि उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है। जनता की आंखों में धूल झोंकने और जिले की रैंकिंग को गर्त में धकेलने वाले इस रवैये पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
लापरवाही की रडार पर आए ये कद्दावर अधिकारी
जिले की साख को बट्टा लगाने वाले अफसरों पर गाज गिराते हुए डीएम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से लेकर आधी से ज्यादा तहसीलों के उपजिलाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। इन सभी से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
इन प्रशासनिक अधिकारी को भेजी गई नोटिस
उपजिलाधिकारी बारा, करछना, कोरांव, मेजा, हण्डिया और फूलपुर। इसके अलावा विभागीय अध्यक्षों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, बंदोबस्त अधिकारी। विकास व कल्याण विभाग में जिला पंचायती राज अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी। ऊर्जा विभाग के अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खण्ड- हण्डिया।
साख बचाने की चुनौती, सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर देना होगा न्याय
आईजीआरएस रैंकिंग में पिछड़े प्रयागराज को अगर शीर्ष पर वापस आना है, तो प्रशासनिक मशीनरी को अपनी फाइलों से बाहर निकलकर जमीन पर काम करना होगा। जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी अधिकारी तत्काल शिकायतों का नियमानुसार वास्तविक निस्तारण सुनिश्चित करें और कृत कार्यवाही से अवगत कराएं। लापरवाही या उदासीनता बरतने वाले अफसरों के खिलाफ अब केवल नोटिस नहीं, बल्कि सीधे दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
