– दो करोड़ के बकाए ने अपराधी बनने पर किया मजबूर
सामना संवाददाता / मुंबई
एक ऐसा स्वच्छता सैनिक जिसे खुद प्रधानमंत्री मोदी ने ‘लेट्स चेंज’ अभियान के लिए सराहा था, आज सरकारी उपेक्षा का शिकार होकर अपराधी के रूप में मारा गया। रोहित आर्य की कहानी शिक्षा विभाग के घोटाले की पोल खोलती नजर आ रही है। दो करोड़ रुपए के बकाए ने एक समाजसेवी को इतना मजबूर कर दिया कि उसे १७ मासूम बच्चों को बंधक बनाना पड़ा। साथ ही जिस शिक्षा विभाग के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत रोहित को अपनी जान से चुकानी पड़ी। इसी के साथ ही इस वाकये के बाद अब सवाल कई सवाल उठने लगे हैं। क्या पुलिस एनकाउंटर वास्तव में जरूरी था या फिर यह शिक्षा विभाग के घोटाले को दबाने की एक सुनियोजित साजिश थी? फिलहाल, रोहित का मुंह हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। इसी के साथ ही घोटाले की सच्चाई भी दफन हो चुकी है।
रोहित के साथ राख हो गई घोटाले की सच्चाई!
मुंबई के पवई इलाके में गुरुवार दोपहर एक दर्दनाक घटना घटी। पवई स्थित एक स्टूडियो में १७ बच्चों को बंधक बनाए जाने से इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया। घटना की जानकारी मिलते ही मुंबई पुलिस और कमांडो टीम ने तत्काल कार्रवाई कर सभी बच्चों को सकुशल छुड़ा लिया। हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान हुई मुठभेड़ में आरोपी रोहित आर्य मारा गया।
बता दें कि रोहित आर्य ‘मुख्यमंत्री मेरा स्कूल, सुंदर स्कूल’ सरकारी अभियान का समन्वयक था। उसने ‘पीएलसी स्वच्छता मॉनिटर प्रोजेक्ट’ पहल के तहत राज्यभर के स्कूलों में बच्चों को स्वच्छता के बारे में जागरूक करने का काम किया था। इस प्रोजेक्ट के जरिए बच्चों को स्वच्छता दूत बनाकर उनके अभिभावकों तक स्वच्छता का संदेश पहुंचाना इसका उद्देश्य था। इस अभियान के लिए शिक्षण विभाग ने दो करोड़ रुपए का आवंटन किया था। हालांकि, अभियान चलाने के बाद भी शिक्षा विभाग की ओर से पैसे नहीं मिलने का गंभीर आरोप रोहित आर्य ने लगाया था। उसने कहा था कि विभाग ने केवल आश्वासन दिए, लेकिन वास्तव में फंड नहीं दिया।
अनशन और आंदोलन का इतिहास
रोहित आर्य ने इस बकाया राशि की मांग के लिए २०२४ के जुलाई-अगस्त महीने में अनशन शुरू किया था। यह अनशन तत्कालीन शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर के निवास के बाहर किया गया था। अनशन के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसने स्पष्ट आरोप लगाया था कि शिक्षा विभाग ने उसके दो करोड़ रुपए रोके हुए हैं और उसका कहना था कि उसने अपने पैसों से प्रोजेक्ट पूरा किया था।
रोहित आर्य २०१३ से सामाजिक प्रोजेक्ट्स में सक्रिय था। उसने ‘लेट्स चेंज’ नाम से ‘स्वच्छता अभियान’ चलाया था। यह प्रोजेक्ट तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद आया था और उन्होंने इसकी सराहना भी की थी। बाद में २०२२ में शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने महाराष्ट्र में यही अभियान शुरू किया।
