डॉ. हरि जोशी
२६ अगस्त को विश्व कुत्ता दिवस था। दिल्ली के सबसे बड़े कुत्ता प्रेमी का २७ को बिहार में बड़ा आयोजन था। अनेक लोगों की भाषा, कुत्तों की सोहबत में वैसी ही हो जाती है, ऐसे कुत्ता प्रेमी की अध्यक्षता में यह दिवस बहुत प्रभावी रहा। दिल्ली के इस सबसे बड़े कुत्ता पालक ने सिद्ध कर दिया कि सोहबत के असर में वह किसी खूंखार कुत्ते से कम नहीं।
एक बार तो गुलाम नबीr आजाद ने स्वयं आपबीती सुनाई थी। घटना राजधानी के उस कुत्ता पालक के बंगले पर ही घटी थी। जब मुख्यमंत्री इस प्रभावी हस्ती से मिलने दिल्ली उसके बंगले पर गए तो मालिक अपने प्रियतम कुत्ते को बिस्कुट खिला रहा था। अपनी रेवड़ के मुख्यमंत्रियों का महत्व इसके सामने गुलाम से अधिक कभी रहता ही नहीं। गुलाम नबी तो गुलाम थे, आजाद सिर्फ यह कुत्ता प्रेमी था। एक घंटा निकल गया, गुलाम प्रतीक्षा करते रहे, मालिक को बात करने की फुरसत नहीं मिली। वह अपने कुत्ते को पूरे मनोयोग से बिस्कुट ही खिलाता रहा। कुत्ते की उपेक्षा कर अपने गुलाम मुख्यमंत्री से यह मालिक बात वैâसे करता? उसे फुरसत ही नहीं थी। गुलाम भी बेचारे कब तक प्रतीक्षा करते?
निराश होकर मुख्यमंत्री ने चलते-चलते यह शेर कहा…
‘तुम्हें कुत्तों से कब फुर्सत,
हम अपने गम से कब खाली,
चलो अब हो गया मिलना,
न तुम खाली न हम खाली।
बेचारे गुलाम ने बुझे मन से उस दिन तो अपमान सहन कर लिया और चला गया किन्तु उसी दिन गुलामी की जंजीर को तोड़ने का मन उसने बना लिया था। कुछ ही दिन बाद उस रेवड़ से वह दूर हो गया। मैं लॉस एंजिल्स में बैठे-बैठे सब कुछ देखता रहता हूं। भारत के एक भक्त ने कुत्ते को राम-राम बोलना सिखाया, आरती के बाद कुत्ता राम-राम बोलता है। दूसरे कुत्ता प्रेमी ने अपने पालतू को मूर्तियों के सामने साष्टांग दंडवत करना सिखाया। यह भी देखा जा सकता है।
इस कुत्ता पालक ने कुत्ते को गाली देना सिखाया। हां, कुत्ता इतना समझदार तो निकला कि उसने मालिक की जीवित मां को छोड़, अन्य की दिवंगत मां को उसी शैली में प्रणाम किया, किस विधि से किया, यह पाठक समझ चुके हैं। भारत में मेरे गांव के पास एक पहुंचा हुआ व्यक्ति रहता था, जब किसी आगंतुक को वह गाली दे देता था तो उसका काम बन जाता था। कलियुग के इस व्यक्ति ने गाली दी है, विरोधी पक्ष को बिहार में यह चुनाव जिताकर ही छोड़ेगा।
