सामना संवाददाता / मुंबई
देश के प्रमुख आईटी केंद्रों में शामिल पुणे के राजीव गांधी आईटी पार्क से यह चिंताजनक मामला सामने आया है। आईटी पार्क के फेज-२ में संचालित एक कंपनी ने कथित तौर पर अचानक अपना कार्यालय बंद कर दिया। हिंजवाड़ी के आईटी पार्क में उक्त कंपनी में रातों-रात अपने दफ्तर बंद कर फरार हो गई। सुबह ७०० इंजीनियर सड़क पर बेरोजगार नजर आए।
पुणे में एक दिन पहले जहरीली शराब ने जहां १४ लोगों की जान ले ली, जिससे लोग अभी सदमे से उबर भी नहीं पाए थे कि बेरोजगारी की मार ने लोगों को एक और झटका दिया है। जानकारी के अनुसार, कंपनी ने पिछले वर्ष बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान चलाकर सैकड़ों युवाओं को नौकरी दी थी। इनमें अधिकांश प्रâेशर और ट्रेनी इंजीनियर शामिल थे। कुछ महीनों तक कंपनी का कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन इस वर्ष फरवरी से कर्मचारियों के वेतन में लगातार देरी शुरू हो गई। कर्मचारियों का कहना है कि पहले हर महीने ७ या ८ तारीख तक वेतन उनके खातों में जमा हो जाता था, लेकिन बाद में भुगतान में लगातार देरी होने लगी। स्थिति ऐसी बन गई कि कई कर्मचारियों को एक-एक महीने तक वेतन नहीं मिला। जब कर्मचारियों ने प्रबंधन से जवाब मांगा तो उन्हें बताया गया कि कंपनी का आंतरिक ऑडिट चल रहा है और बकाया वेतन जल्द जारी कर दिया जाएगा।
आईटी सेक्टर में बढ़ती अनिश्चितता
पिछले कुछ वर्षों से आईटी की दुनिया में युवाओं के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार की गलत नीतियों का असर उद्योग जगत पर पड़ रहा है। नतीजतन कंपनियां अब धीरे-धीरे बंद हो रही हैं। खासकर, पुणे के हिंजवाड़ी आईटी पार्क में पिछले ५ वर्षों में सैकड़ों कंपनियां बंद हो चुकी हैं। हाल के वर्षों में तकनीकी क्षेत्र में छंटनी, ऑटोमेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग के कारण नौकरियों पर दबाव की चर्चा लगातार बढ़ी है।
