भरतकुमार सोलंकी
मुंबई
क्या आज आप यह मान बैठे हैं कि अगर आपके पास दस-बीस करोड़ रुपए हो जाएं तो जीवन की सारी संतुष्टि मिल जाएगी? अगर हां, तो क्या आप यह नहीं भूल रहे कि बीस साल पहले आपने दस करोड़ का सपना क्यों नहीं देखा था? क्या उस समय आपकी सोच छोटी थी या आपका दृष्टिकोण सीमित था? और जब आज आपके आसपास का कोई मित्र, सहकर्मी या प्रतिस्पर्धी पांच सौ करोड़ की संपत्ति के साथ खड़ा होगा, तब क्या आपको अपनी आज की सोच अपर्याप्त नहीं लगेगी?
जरा देश की टॉप ५०० कंपनियों की विकास यात्रा पर नजर डालिए। क्या ये कंपनियां हमेशा से इतनी बड़ी थीं? या ये वही संस्थान हैं जिन्हें आपने अपनी आंखों के सामने छोटे व्यापार के रूप में शुरू होते देखा था? क्या उन्होंने कभी यह कहा कि ‘अब बहुत हो गया, यहीं रुक जाते हैं?’ या फिर उन्होंने समय, पूंजी और रणनीति – तीनों को साथ लेकर लगातार खुद को अगले स्तर पर ले जाने का प्रयास किया?
अब यही तुलना अपने जीवन पर लागू करके देखिए। क्या आनेवाले वर्षों में आपके साथ काम करने वाला कोई व्यापारी या पेशेवर पांच सौ करोड़ के म्यूच्यूअल फंड पोर्टफोलियो का मालिक होगा, जबकि आप दस-बीस करोड़ पर ही संतोष कर लेंगे? तब उस अंतर का असर सिर्फ आपके बैंक बैलेंस पर पड़ेगा या आपके आत्मविश्वास और पहचान पर भी? क्या आप उस समय खुद को प्रोफेशनल बिजनेसमैन की श्रेणी में देख पाएंगे? सवाल यह नहीं है कि आप कितना कमा रहे हैं, असली सवाल यह है कि आप कितना सोच रहे हैं। क्या आपकी वित्तीय योजना सिर्फ आज की जरूरतों तक ही सीमित है या अगले बीस-तीस वर्षों की संभावनाओं को भी समेटे हुए है? क्या आपने कभी अपने पैसे को एक बिजनेस पार्टनर की तरह काम पर लगाया है या वह सिर्फ बैंक बैलेंस बनकर पड़ा है? अगर आप सच में खुद को प्रोफेशनल बिजनेसमैन मानना चाहते हैं, तो क्या आपको अपनी सोच, लक्ष्य और कार्ययोजना – तीनों को अपग्रेड नहीं करना चाहिए? क्या यह जरूरी नहीं कि आप स्पष्ट रूप से तय करें कि अगले १०, २० और ३० वर्षों में आपकी नेटवर्थ कहां होनी चाहिए और क्या यह काम बिना एक सक्षम फाइनेंशियल एडवाइजर के संभव है?
नया वर्ष सिर्फ वैâलेंडर बदलने का अवसर नहीं होता, यह सोच बदलने का भी समय होता है। क्या आप इस नए वर्ष में यह संकल्प लेने को तैयार हैं कि आपकी वित्तीय यात्रा सिर्फ संतोष तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विस्तार और नेतृत्व की ओर बढ़ेगी? आज ही अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से संपर्क कीजिए, दीर्घकालिक लक्ष्य तय कीजिए और ऐसी कार्ययोजना बनाइए जो आपको भी उस श्रेणी में खड़ा कर सके, जहां बड़े खिलाड़ी खड़े होते हैं। क्योंकि इतिहास गवाह है, जो बड़ा सोचता है, वही बड़ा बनता है।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)
