-अरुण कुमार गुप्ता
बिहार विधान परिषद के चुनाव नतीजों ने स्थापित राजनीतिक चेहरों और दलों के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आठ सीटों के लिए हुए चुनाव में पांच मौजूदा एमएलसी अपनी सीट नहीं बचा सके। सबसे चर्चित परिणाम पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का रहा, जहां राजद के संजीव कुमार सिंह ने भाजपा के पांच बार के एमएलसी नवल किशोर यादव को हराकर करीब तीन दशक पुराने प्रतिनिधित्व का अंत कर दिया। वहीं, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने दरभंगा शिक्षक सीट जीतकर पहली बार विधान परिषद में प्रवेश किया। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में नवल किशोर यादव की हार चुनाव का प्रमुख घटनाक्रम रही। लंबे समय से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे यादव को राजद के संजीव कुमार सिंह ने पराजित किया। इस परिणाम ने भाजपा के सामने अपने पुराने प्रभाव वाले क्षेत्र में समर्थन के आधार की समीक्षा करने का सवाल खड़ा किया है। हालांकि, इस एक चुनाव को पूरे बिहार के मतदाताओं के रुझान का पैमाना नहीं माना जा सकता। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा को हराया। राय पहले भाजपा से जुड़े रहे थे। दूसरी ओर, पांच सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी।
चुनाव नतीजों से शिक्षक राजनीति में नई हलचल!
बिहार विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव नतीजों को लेकर सामने आई खबरों ने शिक्षक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। चारों शिक्षक सीटों पर मौजूदा विधान पार्षदों की हार की खबर ने पुराने राजनीतिक समीकरणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन प्रतिनिधियों के पास पहले से अनुभव और पद का लाभ था, वे अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए। अब सवाल है कि आखिर शिक्षकों के बीच उनकी पकड़ क्यों कमजोर पड़ी? इन नतीजों को केवल उम्मीदवारों की हार-जीत तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिनिधियों का मूल्यांकन उनके कामकाज, शिक्षकों से संवाद, सेवा संबंधी समस्याओं और चुनाव के दौरान किए गए वादों के आधार पर भी होता है। चुनाव परिणाम राजनीतिक दलों और शिक्षक संगठनों के लिए भी समीक्षा का अवसर हैं। उम्मीदवारों का चयन, शिक्षकों के बीच संगठन की सक्रियता और स्थानीय समस्याओं पर प्रभावी पैरवी जैसे मुद्दे अब चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। लेकिन हार को किसी एक कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा, जब तक उसके समर्थन में पर्याप्त तथ्य उपलब्ध न हों।
बिहार के एमएलसी चुनाव में निर्दलीयों ने दिखाया दम!
बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने राजनीतिक दलों का ध्यान खींचा है। आठ सीटों के इस मुकाबले में जहां भाजपा, जेडीयू, राजद और जन सुराज ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, वहीं दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल कर यह दिखाया कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला केवल पार्टी के चुनाव चिह्न तक सीमित नहीं रहता। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय राहुल राज की जीत और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बंशीधर ब्रजवासी की सफलता इस चुनाव के प्रमुख नतीजों में शामिल रही। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का चुनावी स्वरूप विधानसभा चुनाव से अलग होता है। यहां मतदाता वर्ग सीमित और विशिष्ट होता है। ऐसे में उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, संबंधित समुदाय से उसका संवाद, स्थानीय समस्याओं पर उसकी सक्रियता और पिछले कामकाज की धारणा चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है। फिर भी इन परिणामों ने स्थापित दलों के लिए उम्मीदवार चयन और स्थानीय संगठन की प्रभावशीलता पर विचार करने का अवसर जरूर पैदा किया है।
