सामना संवाददाता / नई दिल्ली
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दल अब उनके खिलाफ प्रतीकात्मक हटाने की कार्यवाही आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं। एसआईआर और मतदाता सूची संबंधी विवादों के बीच इस कार्यक्रम को राजनीतिक विरोध के नए रूप के तौर पर देखा जा रहा है।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग ने कुछ शिकायतों पर अपेक्षित पारदर्शिता नहीं दिखाई। दूसरी तरफ आयोग अपनी प्रक्रियाओं को नियमों और वैधानिक अधिकारों के अनुरूप बताता रहा है। प्रस्तावित कार्यक्रम के आयोजन स्थल को लेकर भी बदलाव की चर्चा है। रामलीला मैदान में अनुमति संबंधी अड़चनों के बाद अन्य स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने की योजना सामने आई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी सार्वजनिक या प्रतीकात्मक सुनवाई से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है? संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद में विशेष प्रक्रिया और आवश्यक बहुमत की शर्तें लागू होती हैं। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के लिए सार्वजनिक विश्वास महत्वपूर्ण है। इसलिए विवादित निर्णयों के रिकॉर्ड, कारण और शिकायतों पर कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराना संस्थागत पारदर्शिता के हित में होगा।
मीरा कुमार करेंगी कार्यवाही की अध्यक्षता!
इंडिया गठबंधन ने ३० अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली स्थित आवास, १० राजाजी मार्ग पर प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ आयोजित करने की तैयारी पूरी की है। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कार्यवाही संचालित करेंगी। कार्यक्रम दोपहर ३:३० बजे प्रस्तावित है।
प्रियंका, डेरेक ओब्रायन और वाम दलों के नेताओं की बैठक; विपक्ष ने तय की जन महाभियोग की रूपरेखा!
२९ अक्टूबर को खड़गे के आवास पर प्रियंका गांधी, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन, समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक और वाम दलों के नेताओं ने कार्यक्रम की तैयारियों पर चर्चा की। यह आज का स्वतंत्र राजनीतिक घटनाक्रम था।
खड़गे प्रस्ताव रखेंगे, राहुल गांधी देंगे समापन भाषण;
१९ दलों के नेता एक मंच पर!
आज की तैयारियों के अनुसार, खड़गे कार्यवाही की शुरुआत करेंगे और राहुल गांधी समापन संबोधन देंगे। लगभग ३० वक्ताओं में विपक्षी नेता, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और एसआईआर से प्रभावित होने का दावा करने वाले मतदाता शामिल होंगे। कार्यक्रम के सोशल मीडिया पर सीधे प्रसारण की भी योजना है।
सीईसी को लेकर राजनीतिक टकराव तेज; संविधान के तहत पद से हटाने के लिए संसद की विशेष प्रक्रिया जरूरी
