-महाराष्ट्र में ९ महीने में ११,३२६ लोगों की मौत
-हजारों परिवारों के घर उजड़े
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा सरकार और ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जनवरी से सितंबर २०२६ के बीच राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में ११,३२६ लोगों की जान चली गई। आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में जनवरी से सितंबर के बीच कुल २६,९१५ सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गर्इं। इनमें से १०,४४४ दुर्घटनाएं जानलेवा साबित हुर्इं। ये आंकड़े बताते हैं कि सड़क सुरक्षा का सवाल केवल यातायात नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों की बनावट, खतरनाक मोड़, तेज रफ्तार और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं से भी जुड़ा है।
मुंबई में भी मौतों का सिलसिला
मुंबई में जनवरी से सितंबर २०२६ के दौरान २४८ जानलेवा सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें २६० लोगों की मौत हुई। ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटनाओं की आशंका वाले ब्लैक स्पॉट की पहचान कर सुधारात्मक उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि इन उपायों का असर जमीन पर कितनी तेजी से दिखाई देगा। सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को समय पर एंबुलेंस और फौरन अस्पताल में भर्ती कराने की सुविधा मुहैया नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है एंबुलेंस सेवाओं, अस्पतालों की तैयारी और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सरकार को जोर देना चाहिए है। सड़क हादसों में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या कम करने के लिए सरकार, ट्रैफिक पुलिस, लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कोई ठोस तथा समन्वित कार्रवाई करते नजर नहीं आते हैं।
आखिर कब जागेगा प्रशासन
सरकार और पुलिस की ओर से सड़क हादसों को रोकने के लिए कार्रवाई किए जाने के दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद हजारों लोगों की जान जाना इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है। यातायात विभाग केवल चालान काटने और नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाने में व्यस्त है,लेकिन हो रहे सड़क दुर्घटनाओं पर कोई फिक्र नहीं है । इसके लिए खतरनाक सड़कों की पहचान, व्रैâश बैरियर, सुरक्षित पैदल पारपथ और गति नियंत्रण जैसे उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है।
