फिरोज खान
-प्रेम में अधिकार नहीं, सम्मान जरूरी है
– कब सुरक्षित होंगी कॉलेज की युवतियां
महाराष्ट्र में एकतरफा प्रेम के नाम पर युवतियों पर हो रहे हमलों ने महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिंधुदुर्ग के कुडाल में सोशल मीडिया के जरिए पहचान बनाने वाले युवक ने कॉलेज छात्रा दामिनी पालव की हत्या कर दी। युवती द्वारा प्रेम स्वीकार नहीं करने और उसका विवाह तय होने से आरोपी नाराज था। घर लौटते समय युवती पर धारदार हथियार से हमला किया गया।
इनकार की सजा मौत
यह कोई अकेली घटना नहीं है। सितंबर २०२६ में अमरावती में १८ वर्षीय कॉलेज छात्रा शर्वरी हाडके की एक युवक ने चाकू मारकर हत्या कर दी, वहीं अक्टूबर में नांदेड़ में शादी का प्रस्ताव ठुकराने पर १९ वर्षीय छात्रा पर धारदार हथियार से हमला किया गया। इन घटनाओं में प्रेम प्रस्ताव ठुकराने के बाद हिंसा की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। मुंबई में भी प्रेम प्रस्ताव ठुकराने पर महिला पर चाकू से हमला करने के मामले में अदालत ने अगस्त २०२६ में आरोपी अनिल बाबर को १० साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
समाज और पुलिस की जिम्मेदारी
सोशल मीडिया पर दोस्ती करना अपराध नहीं, लेकिन किसी पर प्रेम थोपना, पीछा करना या धमकाना गंभीर मामला है। शिकायत मिलने पर समय रहते कार्रवाई, कॉलेजों में सुरक्षा व्यवस्था और युवाओं में सहमति के प्रति जागरूकता जरूरी है।
सवाल यह है कि आखिर कब तक बेटियों को किसी की सनक की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी। प्रेम में अधिकार नहीं, सम्मान जरूरी है।
