माधुरी दीक्षित-नेने
-माधुरी दीक्षित ने वर्ष १९८४ में राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म ‘अबोध’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने अपनी खूबसूरती, शालीनता, शानदार नृत्य और दमदार अभिनय के दम पर हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई। ‘धक धक गर्ल’ के नाम से लोकप्रिय माधुरी को ग्लैमर और प्रतिभा का अद्भुत संगम माना जाता है। लंबे समय तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली माधुरी आज भी मनोरंजन जगत की सबसे पसंदीदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं। इन दिनों वह नेटफ्लिक्स की डार्क कॉमेडी क्राइम फिल्म ‘मां बहन’ में मां रेखा की मुख्य भूमिका निभा रही हैं। यह फिल्म ४ जून से स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध होगी। पेश हैं, माधुरी दीक्षित से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
-माधुरी, ‘मां-बहन’ उत्तर प्रदेश की कहानी है। आपकी लोकप्रियता पूरे भारत, खासकर उत्तर भारत में बेमिसाल है। इसका राज क्या है?
खूबसूरती देखने वाले की नजर में होती है, मैं यह बात दृढ़ता और विनम्रता से कहना चाहूंगी। सभी देशवासी मुझसे प्यार करते हैं, इसीलिए उन्होंने मुझे महाराष्ट्र के साथ-साथ पूरे देश का प्रिय बना दिया। हालांकि, मेरी मातृभाषा मराठी है, मैंने अपनी हिंदी पर पूरा ध्यान दिया और उसमें गलतियां न करने का पूरा ख्याल रखा। निर्देशकों और लेखकों ने मुझ पर बहुत मेहनत की। इसीलिए मैं उत्तर भारत में, जो हमारा हिंदी भाषी क्षेत्र है, इतनी लोकप्रिय हुई। इस लोकप्रियता का श्रेय उन सभी लेखकों और निर्देशकों को जाता है। मैं तो बस नाममात्र की कलाकार हूं।
-‘मां बहन’ जैसा विवादित शीर्षक होने के बावजूद आपने यह फिल्म क्यों स्वीकार की?
मैंने ‘मां बहन’ इसलिए स्वीकार की क्योंकि इसमें मुझे बेहद दमदार और अलग भूमिका मिली, जैसी पहले कभी नहीं निभाई। अब मुझे सिर्फ ग्लैमरस किरदारों की जरूरत नहीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं आकर्षित करती हैं। निर्देशक सुरेश त्रिवेनी की फिल्मों में महिला पात्र हमेशा मजबूत होते हैं, इसलिए उन पर भरोसा था। मैं सुरेश त्रिवेनी और निर्माता विक्रम मल्होत्रा की आभारी हूं कि उन्होंने मुझे इस भूमिका के लिए चुना। फिल्म में तृप्ति डिमरी, धारणा दुर्गा और गीतांजलि कुलकर्णी के किरदार भी बेहद प्रभावशाली हैं।
-इस फिल्म में मां का किरदार निभाने में आपको कोई झिझक या कठिनाई हुई?
नहीं, क्योंकि रेखा का किरदार बेहद दमदार और अलग है। जब सुरेश त्रिवेनी ने कहानी सुनाई और फिल्म का नाम ‘मां बहन’ बताया, तो मैं चौंक गई, लेकिन पूरी कहानी सुनने के बाद लगा कि यह शीर्षक बिल्कुल सही है। रेखा एक अकेली मां है, जिसका परिवार पारंपरिक नहीं है। समाज की सोच, पड़ोस का माहौल और उसके संघर्ष इस किरदार को खास बनाते हैं। यही वजह थी कि मैंने यह भूमिका तुरंत स्वीकार कर ली।
-आपके साथ महिला कलाकार भी हैं…उनके साथ आपका रिश्ता वैâसे विकसित हुआ?
हमने खूब तैयारी की, पूर्वाभ्यास किया, संवाद पढ़े, कलाकारों के रूप में एक साथ काम किया, लेकिन मुझे लगता है कि दो अलग-अलग संस्कृतियों और अलग-अलग विचारधाराओं में पले-बढ़े लोगों के रूप में एक साथ काम करना महत्वपूर्ण है।
-इस भूमिका में क्या-क्या चुनौतियां थीं?
आपकी व्याख्या में, आपकी किताब में, आपके उपन्यासों में, मां की एक विशिष्ट छवि है। आपकी मां दयालु है, बच्चों को निस्वार्थ प्रेम करती है, उनसे प्यार करती है, अनेक गुणों से परिपूर्ण है। वह मां की इस छवि के बिल्कुल विपरीत है। रेखा लड़कियों के बारे में सोचती है, लेकिन वह अपने लिए भी जीना चाहती है। मां आदर्श मां, पत्नी, गृहिणी होती है। रेखा इन सीमाओं से परे है। रेखा परिपूर्ण नहीं है। वह अपूर्ण है। उसकी पूर्णता इसी अपूर्णता में निहित है। मुझे रेखा के किरदार का यह पहलू बहुत पसंद आया।
-आप सुपरस्टार, बेहतरीन डांसर और खूबसूरत हैं, फिर भी क्या कोई कमी महसूस होती है?
मुझे लगता है कि दुनिया में कोई भी सौ प्रतिशत परिपूर्ण नहीं है। हर किसी में कुछ न कुछ कमियां होती हैं, चाहे वे कितनी भी मामूली क्यों न हों। मैं भी परिपूर्ण नहीं हूं। ये कमियां ही इंसान को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
