मुख्यपृष्ठस्तंभगजबे है : यू सै हरियाणा; अजगर पर सीमा-पंचायत!

गजबे है : यू सै हरियाणा; अजगर पर सीमा-पंचायत!

उमा सिंह

अंबाला के उज्जल माजरी गांव में सड़क किनारे करीब दस फुट तीन इंच लंबा और २३ किलो वजनी अजगर मृत मिला। गांव हरियाणा-हिमाचल सीमा के पास है; सो दोनों राज्यों के वन्यजीव विभाग मौके पर पहुंचे। पहले नक्शा देखकर तय किया गया कि अजगर हरियाणा की हद में मिला है; फिर हरियाणा की टीम उसे पोस्टमार्टम के लिए ले गई। पांच डॉक्टरों के पैनल ने जांच की; मौत का कारण रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा। अरै भाई, अजगर तो सड़क किनारे पड़ा था; सरकारी अमले ने पहले उसकी लोकेशन का हिसाब लगाया! ‘म्हारा इलाका कि थारा?’ की पड़ताल के बाद ही पोस्टमार्टम की गाड़ी रवाना हुई। दो राज्यों की टीम पहुंची, नक्शा बना, सीमा जांची गई; अजगर की मौत की जांच से पहले जगह का पैâसला हो गया। बात गलत नहीं; सीमा तय करना जरूरी था। पर इस घटना ने दिखा दिया कि सरकारी काम में भूगोल भी पूरी तैयारी से आता है। प्रकृति को खेत, सड़क और राज्य की लकीरें नहीं रोकतीं; फाइल को जरूर बताना पड़ता है कि मामला किस दफ्तर का है। अब रिपोर्ट बताएगी अजगर की मौत कैसे हुई; जिम्मेदारी किसकी थी, यह सीमा पहले ही बता गई!
अरै, आधार में नाम दूसरा; फैसला जांच कै बाद!
सोनीपत की एक महिला ने पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया है कि जिस व्यक्ति से उसने शादी की, उसने अपना नाम और पहले से विवाहित होने की बात छिपाई। महिला के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर पहचान के बाद वह उसे जॉनी नाम से जानती थी और दोनों ने शादी की। करीब छह महीने बाद उसके बैग में आधार कार्ड मिला, जिस पर जावेद खान नाम लिखा था। महिला ने पहली शादी, बच्चों और प्रताड़ना को लेकर भी आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि की; दोनों पक्षों को बुलाकर जांच की जा रही है। आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। अरै, आधार कार्ड ने सवाल जरूर खड़े किए; पर वह अदालत का पैâसला थोड़े है! सोशल मीडिया की चौपाल में तो कार्ड देखते ही पूरी कहानी का आखिरी पन्ना लिख दिया गया। कोई जांच से पहले ही दोष तय कर रहा है, कोई हर बात को अफवाह बता रहा है; जबकि पुलिस को दोनों पक्षों की बात सुननी है। मामला गंभीर है; शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। नाम, पहचान और पहले विवाह से जुड़े आरोपों की सच्चाई पड़ताल के बाद ही सामने आएगी। भाई, वायरल पोस्ट की रफ्तार घणी तेज हो सकती है; न्याय की गाड़ी सबूत देखकर चलती है। फिलहाल आरोप को आरोप रहने दें; पैâसला जांच वैâ बाद!

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