मुख्यपृष्ठस्तंभजीवन दर्पण : चोट से होगा बचाव, मां करे पूर्णिमा व्रत

जीवन दर्पण : चोट से होगा बचाव, मां करे पूर्णिमा व्रत

 डॉ. बालकृष्ण मिश्र


गुरुजी, क्या मेरी कुंडली में कालसर्प योग है, बताएं? – राघव गोपाल दुबे
(जन्म- १९ अक्टूबर २०१७, समय- रात्रि ७:४५, स्थान- भिवंडी, ठाणे)
राघव जी, आपका जन्म गुरुवार के दिन चित्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ है और राशि आपकी कन्या बन रही है। यदि तिथि के आधार पर हम देखें तो अमावस्या तिथि में आपका जन्म हुआ है। अमावस्या तिथि पितरों की मानी जाती है और इसके स्वामी पितर होते हैं। यदि लग्न के आधार पर हम देखें तो वृषभ लग्न में आपका जन्म हुआ है और वृषभ लग्न का स्वामी शुक्र आपकी कुंडली में नीच राशि का हो करके पंचम भाव पर बैठा हुआ है। छठे भाव के स्वामी पराक्रम भाव पर राहु बैठा हुआ है और भाग्य भाव पर केतु बैठा हुआ है, जिसकी वजह से आपकी कुंडली में वासुकी नामक कालसर्प योग बना हुआ है। इस योग के कारण बार-बार चोट चपेट लगने की संभावनाएं बनी रहती हैं। वैसे भी अमावस्या तिथि पर चंद्रमा क्षीण होता है। अत: आपकी मां को चाहिए की वो पूर्णिमा व्रत रहें और वासुकि नामक कालसर्प योग का पूजन वैदिक विधि से जरूर करवाएं। जीवन को विस्तारपूर्वक जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरुजी, शिक्षा के प्रति मन में एकाग्रता नहीं बन पा रही है? -आशुतोष ज्ञानचंद जायसवाल
(जन्म- ३ मई २०१०, समय- सायं ६:०९ बजे, स्थान- घाटकोपर, मुंबई)
आशुतोष जी, आपका जन्म सोमवार के दिन पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ है और आपकी राशि धनु बन रही है। लग्न के आधार पर अगर हम देखें तो तुला लग्न में आपका जन्म हुआ है। तुला लग्न का स्वामी शुक्र लग्नेश और अष्टमेश है, जो अष्टम भाव पर बैठा हुआ है। इस कारण आप बहुत इमोशनल प्रवृत्ति के हैं। लेकिन ज्यादा इमोशनल होना आपके लिए हानिकारक होगा। मन की एकाग्रता न होने का मूल कारण आपकी कुंडली में बना हुआ है। कुंडली में चंद्रमा के साथ नीच राशि का राहु बैठा हुआ है, जो पराक्रम भाव पर बैठकर आपके मनोबल को कमजोर बना देता है। इसके लिए घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आपकी कुंडली में सूर्य उच्च राशि का हो करके सप्तम भाव पर बैठा हुआ है और सप्तम भाव का स्वामी मंगल नीच राशि का हो करके बैठा हुआ है। आपकी कुंडली में वासुकी नामक कालसर्प योग और भाग्य ग्रहण दोष बना हुआ है। वासुकी नामक कालसर्प योग की पूजा वैदिक विधि से कम से कम तीन बार करवाएं। महादशा के आधार पर अगर हम देखें तो सूर्य की महादशा में केतु का अंतर इस समय चल रहा है, जो ७ सितंबर २०२५ तक चलेगा। इसके बाद में आपका समय अच्छा आएगा।

गुरुजी, क्या मेरी कुंडली मांगलिक है?
– राकेश यादव
(जन्म- ३० अप्रैल २००९, समय- रात्रि ११:५० बजे, स्थान- चांदीवली, मुंबई)
राकेश जी, आपका जन्म गुरुवार के दिन पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ है और आपकी राशि कर्क है। यदि आपके जन्म को लग्न के आधार पर हम देखें हैं तो आपका जन्म धनु लग्न में हुआ है। चौथे स्थान पर मंगल बैठा है, जिस कारण आपकी कुंडली मांगलिक है। आपकी कुंडली में चंद्रमा के साथ केतु अष्टम भाव पर बैठा है, जिस कारण आप इमोशनल प्रकृति के भी हैं। यदि महादशा के आधार पर हम देखें तो इस समय शनि की महादशा चल रही है और शनि की महादशा में वर्तमान में राहु का अंतर चल रहा है। जीवन को विस्तारपूर्वक जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

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