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वसई-विरार की जर्जर इमारतों में रहने वाले १०,००० लोगों की जान खतरे में!

-मनपा के पास इमारतों को ध्वस्त करने या पुनर्वास की योजना नहीं

द्रुप्ति झा / मुंबई

वसई-विरार में कुल २२० इमारतें जर्जर अवस्था में हैं, लेकिन उन्हें खाली नहीं कराया जा रहा है और न ही ध्वस्त किया जा रहा है क्योंकि महानगरपालिका के अधिकारियों के पास निवासियों के पुनर्वास के लिए कोई कारगर योजना ही नहीं है। मिली जानकारी के अनुसार, अभी भी वसई-विरार में १०,००० से ज्यादा लोग जर्जर इमारतों में रह रहे हैं।
महानगरपालिका के आयुक्त मनोजकुमार सूर्यवंशी ने बताया कि महानगरपालिका के अधिकार क्षेत्र में २२० इमारतें सीआई श्रेणी में आती हैं, जिसका अर्थ है कि जन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें खाली करके ध्वस्त किया जाना चाहिए। इन ढांचों में रहने वाले हजारों लोगों का पुनर्वास हमारे सामने एक बड़ी चुनौती है।
मानसून के करीब आते ही महानगरपालिका के अधिकारी हरकत में आ जाते हैं। वे पुरानी और जर्जर इमारतों के संरचनात्मक ऑडिट के लिए नोटिस जारी करते हैं, बॉक्स पर निशान लगाते हैं और रिपोर्ट्स जारी करते है, लेकिन इमारतों पर सी (खतरनाक) या सी२ (बड़ी मरम्मत की जरूरत) का टैग लगाने के बाद ठप पड़ जाती है।
अधिकारियों की कृपा से अवैध काम
अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद वसई-विरार में अवैध निर्माण धड़ल्ले से हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बिल्डर-राजनेता और कुछ अधिकारी अनधिकृत इमारतों को मंजूरी देकर करोड़ों कमा रहे हैं और सुरक्षा उल्लंघनों पर आंखें मूंद रखे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा कि निवासी खतरनाक घरों में फंसे हुए हैं, जबकि धोखेबाज डेवलपर्स मुनाफा लेकर गायब हो जाते हैं।
`हर बार बारिश होने पर हम सो नहीं पाते हैं। मानसून के दौरान हम सभी के लिए यह वाकई डरावना होता है। अधिकारियों ने हमें किसी सुरक्षित जगह पर पहुंचाने के बजाय, यहां ऐसे छोड़ दिया है, जैसे हम बेकार हो गए हों।’
-सुनीता गायकवाड, स्थानीय निवासी

`महानगरपालिका ने हमें बताया कि इमारत असुरक्षित है, लेकिन फिर चले गए। हम कहां जाएं, ये किसी ने बताया और न ही कोई इंतजाम किया गया। हम गरीब हैं, अदृश्य नहीं।’
-इकबाल शेख

`दीवारों पर फफूंद हैं, तार खुले हैं, छत से पानी टपक रहा है। अधिकारी केवल तब दिखाई देते हैं, जब कोई मर जाता है।’
-रेखा जाधव, वसई

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