-विधर्मियों के विध्वंश के शिकार प्राचीन शिवमंदिर में शिवलिंग की पुनः प्राण प्रतिष्ठा
-शैव मतावलंबी भरों के शासनकाल के प्राचीन शिवालय का मुस्लिम शासकों ने कर दिया था विध्वंश
सामना संवाददाता / सुल्तानपुर
खिलजी काल में नष्ट-भ्रष्ट कर दिये गए तत्कालीन कुशपुर के खंडहरों में नए युग का सूत्रपात हो चुका है। यहां विधर्मियों की कुदृष्टि के कारण सैकड़ों वर्षों से उपेक्षित पड़े हुए जीर्णशीर्ण प्राचीन शिव मंदिर का अब जीर्णोद्धार हो गया है। तीन दिवसीय भव्य शिवलिंग प्राणप्रतिष्ठा समारोह में व्यापक स्तर पर शिवभक्तों ने उल्लेखनीय भागीदारी की । इस दौरान चहुंओर ‘ॐ नमः शिवाय’ गूंज उठा। ‘हर हर महादेव’ के खूब जयकारे लगे। बाबा की शोभायात्रा निकली।घरों की मुंडेरों से पुष्पवर्षा की गई और शिवभक्त थिरक उठे। तीन दिनों तक चले प्रतिष्ठापना अनुष्ठान के बाद भव्य शिवलिंग मंदिर परिसर में अपने पूर्व स्थान पर विधिवत स्थापित कर दिये गए। शुक्रवार को देर शाम तक भंडारा चलता रहा।
बता दें कि सुल्तानपुर भरों के शासनकाल में कुशपुर कहा जाता था। खिलजी के शासनकाल में यहां के हिंदू राजा की क्षलपूर्वक हत्या के बाद भयंकर नरसंहार हुआ था और कुशपुर को उजाड़कर मुस्लिम शासक ने ‘सुल्तानपुर’ नाम से पुनः बसाया। उसी पूर्ववर्ती कुशपुर के खंडहरों में सैकड़ों वर्ष से उपेक्षित पड़े जीर्णशीर्ण प्राचीन शिव मंदिर के जीर्णोद्धार का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने गत दिवस बीड़ा उठाया। विभाग प्रचारक श्रीप्रकाश व जिला प्रचारक आशीष की पहल पर शिवाले के जीर्णोद्धार के बाद परिसर में भव्य शिवलिंग की स्थापना का तीन दिवसीय महोत्सव प्रारंभ हुआ। बस्ती में शोभायात्रा निकाली गई। यज्ञाचार्य डा.अखिलेश उपाध्याय की देखरेख में पांच ब्राह्मण विद्वानों द्वारा विधि विधान पूर्वक अनुष्ठान कराया। इस अवसर पर आरएसएस के विभाग संघ चालक व जिले के नामचीन डॉक्टर ए.के. सिंह, जिला कार्यवाह भानु, सह जिला कार्यवाह शक्ति पाठक, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. आरए वर्मा, जगजीत सिंह, आशीष सिंह, रचना अग्रवाल, अनुज प्रताप सिंह, हेमंत सिंह, डीएस मिश्र, संदीप सिंह, रामेंद्र सिंह राणा, सतनाम बग्गा, प्रवीण मिश्र समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी व महिलाएं भी मौजूद रहीं।
