शीतल अवस्थी
हिंदू धर्म मान्यताओं में देवों के देव महादेव पुकारे जाने वाले शिव मूर्त या सगुण और अमूर्त या निर्गुण रूप में पूजे जाते हैं यानी शिव ऐसे देवता है कि जिनकी भक्ति और पूजा साकार और निराकार दोनों रूप में होती हैं। शिव को अनादि, अनंत, अजन्मा माना गया है यानी उनका कोई आरंभ है न अंत है। न उनका जन्म हुआ है, न वह मृत्यु को प्राप्त होते हैं। इस तरह भगवान शिव कोई अवतार न होकर साक्षात ईश्वर माने जाते हैं।
पुराण प्रसंग उजागर करते हैं कि भक्ति से प्रसन्न भगवान शिव ने अपने भक्तों पर स्नेह लुटाते हुए कई अनूठे स्वरूप, गुणों और शक्तियों को प्रकट किया। फिर वह भक्त देव हो या दानव। इन लीलाओं से भगवान शिव कई नामों से स्मरण किए जाते हैं। सावन महीना शिव भक्ति की शुभ व अचूक घड़ी मानी जाती है। यहां प्रस्तुत हैं शिवपुराण के शिव भक्ति से जुड़े ऐसे ५ अनूठे उपाय व अन्य पुराणों में शिव चरित्र के अनछुए रहस्य, जिनको देवताओं से लेकर दानवों तक ने जाना, अपनाया और मनचाही सिद्धियां पाईं। कोई भी व्यक्ति चाहे वह नियमित रूप से शिव भक्ति न भी करता हो, सावन में शिव साधना के इन तरीकों व रहस्यों को जान-समझ व अपना कर कई परेशानियों से छुटकारा पा सकता है।
