-दूध ११२, चीनी ६५, गुड़ ८५ रुपए किलो
-चीनी एक साल में ४० प्रतिशत और प्याज ६४ प्रतिशत महंगा
उमन गुप्ता / मुंबई
गणपति बाप्पा के स्वागत की तैयारी के बीच मुंबई और महाराष्ट्र के आम आदमी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि बाप्पा के लिए मोदक बनाएं या महीने का राशन बचाएं? त्योहारी मौसम में रसोई की जरूरी चीजों के दाम तेजी से बढ़े हैं और आंकड़े बता रहे हैं कि महंगाई अब केवल आर्थिक बहस नहीं, बल्कि सीधे आम परिवार की थाली और जेब पर हमला बन चुकी है।
ताजा बाजार रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई में चीनी का औसत खुदरा भाव करीब ६५ रुपए प्रति किलो, गुड़ करीब ८० रुपए प्रति किलो और खाद्य तेल की कीमतों में करीब ५ प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। महंगाई की असली तस्वीर इससे भी ज्यादा चिंताजनक है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में चीनी की कीमत करीब ४० प्रतिशत और प्याज की कीमत करीब ६४ प्रतिशत तक बढ़ी बताई गई है। यानी जिस रसोई में रोज सुबह चाय, दोपहर में सब्जी और शाम को खाना बनता है, वहां हर तरफ महंगाई का दबाव है।
महंगाई का हिसाब
चीनी: लगभग ६५ रुपए प्रति किलो
गुड़: करीब ८०–८५रुपए प्रति किलो
खाद्य तेल: कई बाजारों में करीब ५ प्रतिशत तक महंगा
चीनी की सालाना बढ़ोतरी: करीब ४० प्रतिशत
जुलाई २०२६ की खाद्य महंगाई: ५.५२ प्रतिशत
दूध ने भी दिया झटका: ९ रुपए प्रति लीटर की छलांग
मुंबईकरों के लिए महंगाई की मार यहीं खत्म नहीं होती। १ सितंबर से भैंस के दूध का थोक भाव ९३ रुपए से बढ़कर १०२ रुपए प्रति लीटर होने वाला है। खुदरा बाजार में इसकी कीमत ११० से ११२ रुपए प्रति लीटर तक पहुंचने की संभावना बताई गई है। यानी एक ही झटके में ९ रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी।
गुड़ ने भी दिखाई कड़वाहट!
महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में गुड़ की कीमतों में पिछले पखवाड़े में करीब २५ प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया है। इसका सीधा असर मिठाई और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की लागत पर पड़ने की आशंका है।
सरकार से पांच तीखे सवाल
१. चीनी ४० प्रतिशत और प्याज ६४ प्रतिशत महंगा—कीमतों पर नियंत्रण कहां है?
२. दूध ११२ रुपए लीटर तक पहुंच रहा है, आम परिवार का बजट कौन संभालेगा?
३. त्योहारी मौसम में गुड़ और खाद्य तेल इतने महंगे क्यों?
४. विकास के दावों के बीच रसोई का खर्च लगातार क्यों बढ़ रहा है?
५. क्या सरकार महंगाई पर ठोस कार्रवाई करेगी या केवल आंकड़ों का खेल चलेगा?
