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मुस्लिम वर्ल्ड : एफ-३५ के बाद अब बी-२ बॉम्बर होगा ढेर!.. ईरान पर ये चाल ट्रंप को पड़ेगी भारी

सूफी खान

मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि ईरान पर अब तक के भयंकर हमले की तैयारी चल रही है। एक्सपर्ट आकलन ये कर रहे हैं कि ईरान ही प्रिवेंटिव स्ट्राइक कर दे इजरायल पर। मिडिल ईस्ट से आ रही रिपोर्ट बताती हैं कि अमेरिका जिस तरह से सामान जमा कर रहा है वो ५ माह पहले की याद दिला रहा है उस वक्त भी फरवरी की शुरुवात से ही अमेरिकी हलचल तेज हो गई थी। २८ फरवरी २०२६ को ईरान पर हमला हुआ और ईरान के सुप्रीम लीडर सैय्यद अयातुल्लाह अली खामेनेई की जान ले ली गई।
बहरहाल जिस तरह से ब्रिटेन ने अमेरिकी सेना को हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया और इंग्लैंड के आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस का इस्तेमाल करने की इजाजत अमेरिका को दे दी है,उससे साफ होता जा रहा है कि तैयारियां तगड़ी हैं। यही वजह है कि ईरान ने हालात को भांपकर ब्रिटेन को भी धमकी दी है कि वो उसका आरएफ फेयरफोर्ड बेस तबाह कर देगा। अमेरिका के जरिए इस्तेमाल किए जा रहे ब्रिटिश बेसों से बी वन फाइटर जेट उड़ने लगे हैं,और बी-२ बॉम्बर लाने की पूरी तैयारी हो गई है। ईरान के खिलाफ अमेरिका के सारे छोटे असलहे पानी मांग चुके हैं अब बड़े हथियार लाए जा रहे हैं। इरादा वही है ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर मारो। पिछली बार ईरान के घोषित न्यूक्लियर प्लांट फार्दो और नतांज पर अमेरिका ने हमला किया था। अब योजना अघोषित या खुफिया प्लांट पर हमले की हो सकती है। जिस तरह से इजरायल में बंकर फिर से खोले जा रहे हैं, उससे लग रहा है कि इजरायल फिर से ईरान पर भयंकर एयर अटैक करेगा। ये भी हो सकता है कि ईरान ही इजरायल पर पहले हमला कर दे। दरअसल ब्रिटेन के इस जंग में आने से ये अंदेशा और बढ़ गया है। ब्रिटेन नाटो का मेंबर है। अमेरिका चाहता है कि ब्रिटेन को इन्वाल्व करो, ताकि अगर ईरान ने ब्रिटेन के किसी बेस पर अटैक किया तो नाटो मुल्क तुर्की को भी मजबूरन ईरान के खिलाफ उतरना पड़ेगा। ईरान भी अंजान नहीं है, यही वजह है कि वो मिडिल ईस्ट में अमेरिका की आंख फोड़ने में लगा है यानी खित्ते में मौजूद अमेरिकी बेस को जबरदस्त तरीके से उड़ा रहा है। ईरान कुवैत और बहरीन में अर्ली डिफेंस सिस्टम तबाह करता जा रहा है। यही वो सिस्टम था जो इजरायल पर ईरान के हमलों को पकड़ता था। पहले ईरान से कुछ भी उड़ता था तो इजरायल को तुरंत पता चल जाता था। उसके पीछे कुवैत बहरीन, सऊदी यूएई और आखिर में जॉर्डन में लगे एयर डिफेंस सिस्टम होते हैं। जो अमेरिका ने वहां लगा रखे हैं। ईरानी मामलों के जानकार कहते हैं कि ईरान कुवैत पर कब्जा करेगा ही करेगा। कुवैत पर कब्जे का मतलब है, कुवैत में मौजूद अमेरिकी बेस पर कंट्रोल। इसकी वजह भी है, जहां से उस पर बेतहाशा हमले हो रहे हैं। अब उस चौकी को खाली कराने का वक्त आ गया है।
लेकिन डोनाल्ड ट्रंप जिस बी-२ बॉम्बर को ईरान के ऊपर भेजने का जोखिम उठा रहे हैं, वो अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी भूल साबित हो सकता है। अमेरिका को भ्रम है कि यह विमान अपनी ‘स्टील्थ टेक्नोलॉजी’ यानी रडार से छिपने की क्षमता के कारण सुरक्षित है। लेकिन रक्षा विशेषज्ञ याद दिला रहे हैं कि इसी खाड़ी युद्ध में ईरान ने अमेरिका के एफ-१५ और एफ-३५ जैसे आधुनिक विमानों को मार गिराया है। यही नहीं, यमन के हूती लड़ाके भी लाल सागर के आसमान में अमेरिका के दो दर्जन के करीब एम क्यू-९ रीपर ड्रोन्स को तिनके की तरह ढेर कर चुके हैं, जिसके बाद अमेरिका को युद्धविराम करके पीछे हटना पड़ा था। बी-२ बॉम्बर भले ही रडार की ध्वनि तरंगों को सोख लेता हो, लेकिन ईरान के पास एक ऐसी गुप्त और अचूक तकनीक है जो रडार पर निर्भर नहीं करती। ईरान इन जहाजों को उनकी थर्मल ट्रेल यानी इंजन से निकलने वाली अत्यधिक गर्मी और इंप्रâारेड किरणों के जरिए दूर से ही ट्रैक कर लेता है। ५२ मीटर चौड़े इस विशालकाय विमान को ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम आसानी से अपनी जद में ले सकते हैं..
अगर ईरान ने अमेरिका का एक बी-२ बॉम्बर गिरा दिया तो अमेरिका की सारी सुप्रीमेसी पिट जानी है…चीन रूस वैसे भी ईरान के पीछे खड़े हैं…जो खित्ते में अमेरिका को कमजोर करने की ताक में पहले से ही बैठे हैं। लेकिन इजरायल की मोहब्बत अमेरिका से क्या-क्या न कराए!

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