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मुस्लिम वर्ल्ड : मिडिल ईस्ट में अमेरिकी भाैकाल ठंडा …बड़े बेआबरू होकर कूचे से निकले!

सूफी खान

ईरान के साथ अमेरिका की जंग अब दोबारा छिड़ने के आसार कम ही हैं। लेकिन ये भी साफ है कि अमेरिका अगर जिद पर अड़ा रहा तो फिर युद्ध भड़क सकता है।
बड़ी खबर ये है कि अमेरिका की एक बहुत बड़ी ताकत मिडिल ईस्ट से वापस लौट रही है। हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे ताकतवर जंगी बेड़े यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ट की। खबर है कि ये अमेरिकी युद्धपोत अब वेस्ट एशिया छोड़कर निकल रहा है। कहा जा रहा है कि ये जंगी बेड़ा मई तक अमेरिका पहुंच जाएगा। अमेरिका के तीन-तीन जंगी बेड़े जिसमें से एक दुनिया का सबसे बड़ा और ताकवर युद्धपोत था। गेराल्ड आर फोर्ट लाकर भी अमेरिका के हाथ कुछ नहीं लगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब भी बंद है। ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन अब भी कायम है।
रिपोर्ट बताती है कि अमेरिकी जंगी बे़ड़ा गेराल्ड आर फोर्ट में ५ हजार लोगों तक का स्टाफ रहता है। ये चलते फिरते युद्ध के मैदान होते हैं, लेकिन ईरान की मिसाइल, ड्रोन और आईआरजीसी नेवी पावर के सामने इन जंगी बेड़ों की एक ना चली। जिससे होर्मुज पर अमेरिकी नेवल ब्लाकेट की कमजोरी को भी समझा जा सकता है।
यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ट वही जहाज है, जिसने ईरान के खिलाफ युद्ध और वेनेजुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी जैसे बड़े ऑपरेशन में हिस्सा लिया था। इसकी तैनाती की सबसे खास बात इसकी लंबी अवधि रही। करीब ३०० दिनों से ज्यादा ये जंगी बेड़ा समुद्र में रहा, जो वियतनाम युद्ध के बाद किसी भी अमेरिकी एयरक्राफ्ट वैâरियर की सबसे लंबी तैनाती मानी जा रही है। अपनी इस लंबी तैनाती के कारण जहाज विवादों में भी रहा है। कई बार इस पर सैनिकों को कम खाना मिलने, आग लगने और सैनिकों के परेशान होने की खबरें आती रही हैं। बहरहाल, यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ट एक नया रिकॉर्ड बनाकर जरूर जा रहा है। अपनी एक ही तैनाती में इसने यूरोप, लैटिन अमेरिका और मिडिल ईस्ट तीनों जगह ऑपरेशन में हिस्सा लिया। हालांकि, मिडिल ईस्ट में इसकी ताकत और भौकाल ईरान के आगे काम ना आई। एक्सपर्ट कहते हैं कि इस वैâरियर की वापसी को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यूएस अपनी सैन्य ताकत कम कर रहा है, जो उसकी हताशा और हार को दिखाते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सांसदों ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से जवाब मांगा था कि इतने लंबे समय तक जहाज को समुद्र में रखने की क्या कीमत है और नेवी पर इसका क्या असर पड़ेगा। इस पर जवाब देते हुए अधिकारियों ने कहा है कि यह एक कठिन लेकिन जरूरी पैâसला था। गौरतलब है कि ईरान के साथ जंग शुरू होने के करीब एक महीने बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी लगा दी है और ईरानी जहाजों को यहां से ना गुजरने देने की बात कही है।
हाल ही में एक रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि ट्रंप ने कहा है कि नाकेबंदी बमबारी से ज्यादा असरदार है और जरूरत पड़ी तो इसे महीनों तक जारी रखा जा सकता है। गुरुवार को ट्रंप ने फिर धमकी दी कि अगला हमला तूफान लेकर आएगा। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर रखा है। ईरान का साफ कहना है कि जब तक उसकी शर्तों पर अमेरिका राजी नहीं होता, होर्मुज नहीं खुलेगा।

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