मुख्यपृष्ठस्तंभएपस्टीन कांड की नई गवाही : ‘रोजा’ ने खोली सत्ता और व्यवस्था...

एपस्टीन कांड की नई गवाही : ‘रोजा’ ने खोली सत्ता और व्यवस्था की पोल

जेफरी एपस्टीन कांड एक बार फिर अमेरिका की न्याय-व्यवस्था, सत्ता-संबंधों और धनबल की काली परतें खोल रहा है। इस बार चर्चा में हैं रोजा, जो एपस्टीन की उन पीड़िताओं में शामिल हैं जिन्होंने अब सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपनी कहानी बताई है। उन्होंने अमेरिकी सदन की निगरानी समिति की पाम बीच, फ्लोरिडा में हुई सुनवाई में गवाही देते हुए आरोप लगाया कि एपस्टीन ने उनका यौन शोषण तब भी किया, जब वह पहले से यौन अपराधों के मामले में घर में नजरबंद था।
रोजा मूल रूप से उज्बेकिस्तान से थीं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें अठारह वर्ष की उम्र में मॉडलिंग के अवसर के नाम पर अमेरिका लाया गया। उनका नाम एपस्टीन के सहयोगी बताए जाने वाले फ्रांसीसी मॉडल स्काउट ज्यां-ल्यूक ब्रुनेल से भी जुड़ता है, जिन पर युवा लड़कियों को मॉडलिंग के बहाने एपस्टीन के नेटवर्क तक पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। रोजा ने गवाही में कहा कि उनके वीजा और अमेरिका में असुरक्षित स्थिति का इस्तेमाल उन्हें दबाव में रखने के लिए किया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यक्ति को जेल में होना चाहिए था, वह घर में रहकर भी पीड़िताओं तक कैसे पहुंचता रहा? एपस्टीन को वर्ष २००८ में बेहद नरम समझौता मिला था, जिसके तहत उसे तेरह महीने की सजा और काम पर जाने जैसी सुविधा दी गई। इसी व्यवस्था को अब कई आलोचक प्रभावशाली व्यक्ति के लिए मिली विशेष छूट मान रहे हैं। रोजा की गवाही ने यही सवाल फिर जिंदा कर दिया है कि क्या कानून कमजोर था या प्रभावशाली लोगों के लिए जानबूझकर कमजोर बना दिया गया था?
यह मामला सिर्फ एक अपराधी की हवस का नहीं, बल्कि उस पूरे तंत्र का है जिसमें धन, संपर्क, मॉडलिंग एजेंसियां, वीजा की जटिलताएं और राजनीतिक प्रभाव मिलकर कमजोर लड़कियों को शिकार बनाते रहे। पाम बीच की सुनवाई में अन्य पीड़िताओं ने भी अपनी पीड़ा सुनाई और अमेरिकी सरकार की चूक पर सवाल उठाए।
रोजा की गवाही इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि न्याय में देरी या नरमी केवल कानूनी भूल नहीं होती; उसका खामियाजा जीवित इंसानों को भुगतना पड़ता है। एपस्टीन भले ही अब जीवित नहीं है, लेकिन रोजा जैसी पीड़िताओं की आवाज आज भी यह पूछ रही है कि जब अपराध इतना संगठित था, तो संरक्षण किसका था और जवाबदेही किसकी होगी।
एपस्टीन कांड से अमेरिकी संसद भी स्तब्ध
वेस्ट पाम बीच में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की ओवरसाइट कमेटी की सुनवाई के दौरान पीड़िताओं और विशेषज्ञों ने जो गवाही दी, उसने सांसदों को स्तब्ध कर दिया। सुनवाई में एक ऐसा वीडियो भी दिखाया गया, जिसके बाद सभागार का माहौल भारी हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, एक पीड़िता अस्पताल से निकलने के तुरंत बाद गवाही देने पहुंची और उसने अपने दर्दनाक अनुभव को सामने रखा। इस कांड का सबसे भयावह पहलू केवल अपराध नहीं, बल्कि वह कथित संरक्षण-तंत्र है, जिसने वर्षों तक पीड़िताओं की आवाज को दबाए रखा।
सुनवाई में गवाह कोर्टनी वाइल्ड ने भी जोरदार तरीके से अपना पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एपस्टीन को गुप्त रूप से राहत देने वाला समझौता किया और पीड़िताओं को न्याय प्रक्रिया से दूर रखा। उन्होंने पीड़ित अधिकार कानूनों को मजबूत करने, अभियोजकों की जवाबदेही तय करने और पीड़ितों को कानूनी प्रतिनिधित्व की गारंटी देने की मांग की।
एपस्टीन की मौत हो चुकी है, लेकिन सवाल अब भी जीवित हैं, किसने आंखें मूंदी? किसने सौदे किए? और पीड़िताओं को इतने वर्षों तक न्याय से वंचित क्यों रखा गया? अमेरिकी संसद में गूंजती ये आवाजें दुनिया को याद दिलाती हैं कि यौन शोषण के मामलों में पीड़िता की चुप्पी सहमति नहीं होती, बल्कि कई बार भय, दबाव और व्यवस्था से टूटा भरोसा होती है। एपस्टीन कांड अब अपराध से आगे बढ़कर सत्ता की जवाबदेही का प्रतीक बन चुका है।

अन्य समाचार