-पैसों के लिए पिता ने जीवित बेटे को ‘मार’ डाला!
खुशबू सिंह
ये सच्चा गुनाह है इसी साल मार्च महीने की, जब दिल्ली के नजफगढ़ में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने रिश्तों की पवित्रता को तार-तार कर दिया। एक पिता ने लालच के आगे घुटने टेकते हुए अपने जीवित बेटे को मृत घोषित कर २ करोड़ रुपए के इंश्योरेंस की ठगी की साजिश रची। लेकिन सच की जीत हुई और पुलिस ने इस घिनौने खेल का पर्दाफाश कर तीन लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
जब पहली बार पुलिस को हुआ शक
५ मार्च को नजफगढ़ पुलिस स्टेशन में सतीश कुमार नाम के व्यक्ति ने पीसीआर कॉल कर बताया कि उसके बेटे गगन का बाइक एक्सीडेंट हो गया। उसने दावा किया कि गगन के सिर में गंभीर चोटें हैं और वो उसे अस्पताल ले जा रहा है, लेकिन बिना कोई औपचारिक शिकायत या मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) दर्ज कराए सतीश और गगन गायब हो गए। पुलिस को पहली बार शक हुआ।
आरोपी ने पुलिस के खिलाफ रची साजिश!
११ मार्च को सतीश ने दावा किया कि गगन की ६ मार्च को मौत हो गई और उसने हापुड़ के गढ़गंगा में बिना पोस्टमॉर्टम या पुलिस को सूचित किए उसका अंतिम संस्कार कर दिया। उसने उल्टा पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए १२ मार्च को शिकायत दर्ज की, लेकिन पुलिस ने उसकी कहानी पर यकीन नहीं किया और जांच शुरू की।
सीसीटीवी ने किया पर्दाफाश
सीसीटीवी फुटेज ने सारी साजिश बेनकाब कर दी। फुटेज में गगन और एक अन्य व्यक्ति नकली एक्सीडेंट का नाटक करते दिखे। पूछताछ में सतीश ने कबूल किया कि उसने वकील मनमोहन और गगन की मिलीभगत से ये साजिश रची। १३ फरवरी को गगन के नाम पर लिया गया २ करोड़ का इंश्योरेंस क्लेम हड़पना मकसद था। जांच में खुलासा हुआ कि एक डॉक्टर ने भी नकली चोट बनाकर इस धोखाधड़ी में साथ दिया। हापुड़ में कोई अंतिम संस्कार हुआ ही नहीं था।
२५ मार्च को पुलिस ने सतीश, मनमोहन और डॉक्टर को गिरफ्तार कर धोखाधड़ी व साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया। ये मामला सिर्फ अपराध का नहीं, बल्कि लालच की उस अंधी दौड़ का है, जहां एक पिता ने अपने बेटे को पैसे के लिए दांव पर लगा दिया। ये कहानी समाज को झकझोरती है कि क्या रिश्तों की कीमत सिर्फ पैसा है?
